MSME Rules: कारोबारियों की लूटेगी लंका, MSME को लेकर आया नया नियम

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Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्‍ली: MSMEs के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा लाए गए नए पेमेंट नियम ने बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि कई छोटे कारोबारी तो खुद के MSME रजिस्ट्रेशन को ही रद्द कर रहे हैं। असेसमेंट ईयर 2024-2025 के लिए इस नए पेमेंट नियम के मुताबिक 50 करोड़ के नीचे टर्नओवर वाले MSME से खरीदारी करने वाले कस्टमर्स को डिलीवरी के 45 दिनों के भीतर MSME से खरीदे गए सामान के पेमेंट को सेटल करना होगा। इसके अलावा MSME पर पेंडिंग पेमेंट के भुगतान का निपटान 31 मार्च, 2024 तक किया जाना चाहिए। अगर खरीदार नई पेमेंट टाइमलाइन का पालन नहीं करते हैं, तो MSME को किए जाने वाले बकाया भुगतान को टैक्स योग्य इनकम माना जाएगा।”

FAM के प्रेजिडेंट जीतेंद्र शाह कहते हैं, ‘सरकार द्वारा MSME को समय पर भुगतान मिल सके, इसके लिए लाए गए इस नए नियम का बाजार पर विपरित असर हुआ है कि लघु उद्योग का माल ही नहीं बिक रहा। बड़ों की मौज हो गई है, क्योंकि नए पेमेंट रुल्स में लघु उद्योग टिक ही नहीं सकेंगे। इसलिए हम लटर बनवा रहे हैं और जो 50 करोड़ के नीचे वाले हैं और वे इस कैटिगरी में अप्रूव्ड हैं या नहीं। जिन्होंने सेल्फ डिक्लेरेशन के तहत ही खुद को MSME डिक्लेयर किया है, उन्हें अलग कर रहे हैं। कई बायर्स ने 31 मार्च, 2024 को देखते हुए माल वापस करना शुरू कर दिया है।’

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हालांकि, इनकम टैक्स के जानकारों का कहा है कि MSMEs के हितों के लिए लाए गए MSME payment rule को समझने की जरूरत है, क्योंकि एक बार रजिस्ट्रेशन कैंसल करने के बाद उन्हें भविष्य में कई लाभों से वंचित होना पड़ सकता है। मेटल कारोबारी शाह ने बताया कि सरकार का इरादा MSME की रक्षा करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है, लेकिन इस नए रेग्यूलेशन ने बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं और MSME को दिए गए ऑर्डर रद्द करने की नौबत आ गई है।

भारत मर्चेंट चैंबर्स के ट्रस्ट्री राजीव सिंगल का कहना कि बाजार में डर का माहौल है। MSME के नए पेमेंट नियम से बाजार टूट रहा है, ऐसे में हमें लगता है कि रजिस्ट्रेशन कैंसल करवाना ही सही है। वरना अगर MSME रजिस्ट्रेशन रहेगा, तो हमारे बायर्स ने अगर 15 से 45 दिनों के बीच पेमेंट नहीं दिया तो, वो उनके इनकम में शामिल हो जाएगा। राजीव सिंगल कहते हैं, ‘हमनें हमारे हजारों ट्रेडर्स को कहा है कि अगर आपकी फर्म MSME में रजिस्टर्ड है और आप कोई भी लाभ MSME में रजिस्ट्रेशन का सरकार से नहीं ले रहे है तो आपको आपकी फर्म का MSME से रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए। अपने खरीदारों को इस बारे सूचित करें कि वो आपसे निश्चिंत होकर व्यापार करे, क्योंकि अब आपसे माल खरीदने पर 43B(h)उन्हें लागू नहीं होगा।’

CA मनीष गाड़िया कहते हैं, ‘MSME के नए पेमेंट नियम से डरने की जरूरत नहीं और न ही रजिस्ट्रेशन कैंसल करवा कर मिलने वाले तमाम फायदों से वंचित होने की जरूरत है। MSME को समय पर पेमेंट मिले और उसकी वर्किंग कैपिटल की रिक्वायरमेंट पूरी हो सके, इसके लिए इसे कंपनी ऐक्ट में डाला गया। प्रोविजन तो पहले से है, लेकिन इसकी रिपोर्टिंग नहीं हो रही थी, इसलिए इसे इनकम टैक्स के दायरे में डाला और सीए को कहा गया कि वे इसकी ऑडिट रिपोर्टिंग करे। तब यह पता चला और अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि पेमेंट में डिले होने पर 3 गुना इंटरेस्ट देने के अलावा इनकम में ऐड होने की बात आई तो यह बाजार के लिए बैचनी पैदा करने लगा। ऐसे में सलाह है कि डरने की जरूरत नहीं है, अगर पमेंट में डिले हुआ है तो 31 मार्च को आउटस्टेंडिंग खर्चे में क्लैम नहीं मिलेगा। जब तक पेमेंट नहीं होगा, यह इनकम में ऐड रहेगा और पेमेंट होने पर अगले साल डिडक्ट हो जाएगा।

MSME Rules: कारोबारियों की लूटेगी लंका, MSME को लेकर आया नया नियम

Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्‍ली: MSMEs के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा लाए गए नए पेमेंट नियम ने बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि कई छोटे कारोबारी तो खुद के MSME रजिस्ट्रेशन को ही रद्द कर रहे हैं। असेसमेंट ईयर 2024-2025 के लिए इस नए पेमेंट नियम के मुताबिक 50 करोड़ के नीचे टर्नओवर वाले MSME से खरीदारी करने वाले कस्टमर्स को डिलीवरी के 45 दिनों के भीतर MSME से खरीदे गए सामान के पेमेंट को सेटल करना होगा। इसके अलावा MSME पर पेंडिंग पेमेंट के भुगतान का निपटान 31 मार्च, 2024 तक किया जाना चाहिए। अगर खरीदार नई पेमेंट टाइमलाइन का पालन नहीं करते हैं, तो MSME को किए जाने वाले बकाया भुगतान को टैक्स योग्य इनकम माना जाएगा।”

FAM के प्रेजिडेंट जीतेंद्र शाह कहते हैं, ‘सरकार द्वारा MSME को समय पर भुगतान मिल सके, इसके लिए लाए गए इस नए नियम का बाजार पर विपरित असर हुआ है कि लघु उद्योग का माल ही नहीं बिक रहा। बड़ों की मौज हो गई है, क्योंकि नए पेमेंट रुल्स में लघु उद्योग टिक ही नहीं सकेंगे। इसलिए हम लटर बनवा रहे हैं और जो 50 करोड़ के नीचे वाले हैं और वे इस कैटिगरी में अप्रूव्ड हैं या नहीं। जिन्होंने सेल्फ डिक्लेरेशन के तहत ही खुद को MSME डिक्लेयर किया है, उन्हें अलग कर रहे हैं। कई बायर्स ने 31 मार्च, 2024 को देखते हुए माल वापस करना शुरू कर दिया है।’

हालांकि, इनकम टैक्स के जानकारों का कहा है कि MSMEs के हितों के लिए लाए गए MSME payment rule को समझने की जरूरत है, क्योंकि एक बार रजिस्ट्रेशन कैंसल करने के बाद उन्हें भविष्य में कई लाभों से वंचित होना पड़ सकता है। मेटल कारोबारी शाह ने बताया कि सरकार का इरादा MSME की रक्षा करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है, लेकिन इस नए रेग्यूलेशन ने बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं और MSME को दिए गए ऑर्डर रद्द करने की नौबत आ गई है।

भारत मर्चेंट चैंबर्स के ट्रस्ट्री राजीव सिंगल का कहना कि बाजार में डर का माहौल है। MSME के नए पेमेंट नियम से बाजार टूट रहा है, ऐसे में हमें लगता है कि रजिस्ट्रेशन कैंसल करवाना ही सही है। वरना अगर MSME रजिस्ट्रेशन रहेगा, तो हमारे बायर्स ने अगर 15 से 45 दिनों के बीच पेमेंट नहीं दिया तो, वो उनके इनकम में शामिल हो जाएगा। राजीव सिंगल कहते हैं, ‘हमनें हमारे हजारों ट्रेडर्स को कहा है कि अगर आपकी फर्म MSME में रजिस्टर्ड है और आप कोई भी लाभ MSME में रजिस्ट्रेशन का सरकार से नहीं ले रहे है तो आपको आपकी फर्म का MSME से रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए। अपने खरीदारों को इस बारे सूचित करें कि वो आपसे निश्चिंत होकर व्यापार करे, क्योंकि अब आपसे माल खरीदने पर 43B(h)उन्हें लागू नहीं होगा।’

CA मनीष गाड़िया कहते हैं, ‘MSME के नए पेमेंट नियम से डरने की जरूरत नहीं और न ही रजिस्ट्रेशन कैंसल करवा कर मिलने वाले तमाम फायदों से वंचित होने की जरूरत है। MSME को समय पर पेमेंट मिले और उसकी वर्किंग कैपिटल की रिक्वायरमेंट पूरी हो सके, इसके लिए इसे कंपनी ऐक्ट में डाला गया। प्रोविजन तो पहले से है, लेकिन इसकी रिपोर्टिंग नहीं हो रही थी, इसलिए इसे इनकम टैक्स के दायरे में डाला और सीए को कहा गया कि वे इसकी ऑडिट रिपोर्टिंग करे। तब यह पता चला और अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि पेमेंट में डिले होने पर 3 गुना इंटरेस्ट देने के अलावा इनकम में ऐड होने की बात आई तो यह बाजार के लिए बैचनी पैदा करने लगा। ऐसे में सलाह है कि डरने की जरूरत नहीं है, अगर पमेंट में डिले हुआ है तो 31 मार्च को आउटस्टेंडिंग खर्चे में क्लैम नहीं मिलेगा। जब तक पेमेंट नहीं होगा, यह इनकम में ऐड रहेगा और पेमेंट होने पर अगले साल डिडक्ट हो जाएगा।

MSME Rules: कारोबारियों की लूटेगी लंका, MSME को लेकर आया नया नियम

Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्‍ली: MSMEs के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा लाए गए नए पेमेंट नियम ने बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि कई छोटे कारोबारी तो खुद के MSME रजिस्ट्रेशन को ही रद्द कर रहे हैं। असेसमेंट ईयर 2024-2025 के लिए इस नए पेमेंट नियम के मुताबिक 50 करोड़ के नीचे टर्नओवर वाले MSME से खरीदारी करने वाले कस्टमर्स को डिलीवरी के 45 दिनों के भीतर MSME से खरीदे गए सामान के पेमेंट को सेटल करना होगा। इसके अलावा MSME पर पेंडिंग पेमेंट के भुगतान का निपटान 31 मार्च, 2024 तक किया जाना चाहिए। अगर खरीदार नई पेमेंट टाइमलाइन का पालन नहीं करते हैं, तो MSME को किए जाने वाले बकाया भुगतान को टैक्स योग्य इनकम माना जाएगा।”

FAM के प्रेजिडेंट जीतेंद्र शाह कहते हैं, ‘सरकार द्वारा MSME को समय पर भुगतान मिल सके, इसके लिए लाए गए इस नए नियम का बाजार पर विपरित असर हुआ है कि लघु उद्योग का माल ही नहीं बिक रहा। बड़ों की मौज हो गई है, क्योंकि नए पेमेंट रुल्स में लघु उद्योग टिक ही नहीं सकेंगे। इसलिए हम लटर बनवा रहे हैं और जो 50 करोड़ के नीचे वाले हैं और वे इस कैटिगरी में अप्रूव्ड हैं या नहीं। जिन्होंने सेल्फ डिक्लेरेशन के तहत ही खुद को MSME डिक्लेयर किया है, उन्हें अलग कर रहे हैं। कई बायर्स ने 31 मार्च, 2024 को देखते हुए माल वापस करना शुरू कर दिया है।’

हालांकि, इनकम टैक्स के जानकारों का कहा है कि MSMEs के हितों के लिए लाए गए MSME payment rule को समझने की जरूरत है, क्योंकि एक बार रजिस्ट्रेशन कैंसल करने के बाद उन्हें भविष्य में कई लाभों से वंचित होना पड़ सकता है। मेटल कारोबारी शाह ने बताया कि सरकार का इरादा MSME की रक्षा करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है, लेकिन इस नए रेग्यूलेशन ने बाजार में चिंताएं बढ़ा दी हैं और MSME को दिए गए ऑर्डर रद्द करने की नौबत आ गई है।

भारत मर्चेंट चैंबर्स के ट्रस्ट्री राजीव सिंगल का कहना कि बाजार में डर का माहौल है। MSME के नए पेमेंट नियम से बाजार टूट रहा है, ऐसे में हमें लगता है कि रजिस्ट्रेशन कैंसल करवाना ही सही है। वरना अगर MSME रजिस्ट्रेशन रहेगा, तो हमारे बायर्स ने अगर 15 से 45 दिनों के बीच पेमेंट नहीं दिया तो, वो उनके इनकम में शामिल हो जाएगा। राजीव सिंगल कहते हैं, ‘हमनें हमारे हजारों ट्रेडर्स को कहा है कि अगर आपकी फर्म MSME में रजिस्टर्ड है और आप कोई भी लाभ MSME में रजिस्ट्रेशन का सरकार से नहीं ले रहे है तो आपको आपकी फर्म का MSME से रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए। अपने खरीदारों को इस बारे सूचित करें कि वो आपसे निश्चिंत होकर व्यापार करे, क्योंकि अब आपसे माल खरीदने पर 43B(h)उन्हें लागू नहीं होगा।’

CA मनीष गाड़िया कहते हैं, ‘MSME के नए पेमेंट नियम से डरने की जरूरत नहीं और न ही रजिस्ट्रेशन कैंसल करवा कर मिलने वाले तमाम फायदों से वंचित होने की जरूरत है। MSME को समय पर पेमेंट मिले और उसकी वर्किंग कैपिटल की रिक्वायरमेंट पूरी हो सके, इसके लिए इसे कंपनी ऐक्ट में डाला गया। प्रोविजन तो पहले से है, लेकिन इसकी रिपोर्टिंग नहीं हो रही थी, इसलिए इसे इनकम टैक्स के दायरे में डाला और सीए को कहा गया कि वे इसकी ऑडिट रिपोर्टिंग करे। तब यह पता चला और अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि पेमेंट में डिले होने पर 3 गुना इंटरेस्ट देने के अलावा इनकम में ऐड होने की बात आई तो यह बाजार के लिए बैचनी पैदा करने लगा। ऐसे में सलाह है कि डरने की जरूरत नहीं है, अगर पमेंट में डिले हुआ है तो 31 मार्च को आउटस्टेंडिंग खर्चे में क्लैम नहीं मिलेगा। जब तक पेमेंट नहीं होगा, यह इनकम में ऐड रहेगा और पेमेंट होने पर अगले साल डिडक्ट हो जाएगा।

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