Jambhsar Media Digital Desk : 1 रुपये का नोट, पूरी भारतीय करेंसी में है तो सबसे छोटा, लेकिन सबसे ज्यादा इसी की बातें होती हैं. इस नोट को 2 बार बंद किया गया, लेकिन आज तक बाजार से आउट नहीं किया जा सका. इस पर न तो गवर्नर के साइन होते हैं और न ही रिजर्व बैंक इसे छापने को तैयार है. फिर आपके हाथ में रखे 1 रुपये के नोट का कौन है कर्ताधर्ता.आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से.
बैंक और करेंसी से जुड़ा सारा काम आरबीआई ही करता है. इस बात को तो आप और हम बखूबी जानते हैं. यह भी पता है कि सभी नोटों पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का साइन भी होता है. लेकिन, क्या आपको यह पता है कि पूरी करेंसी में सिर्फ 1 रुपये का नोट (One Rupee Note) ऐसा है जिसे न तो रिजर्व बैंक छापता है और न ही उस पर कोई गारंटी देता है. इसे छोड़कर रिजर्व बैंक बाकी सभी तरह के नोट छापता है. इन नोटों पर बाकायदा आरबीआई गवर्नर के साइन भी होते हैं. फिर आखिर क्या वजह है जो 1 रुपये के नोट से ही रिजर्व बैंक को बेरुखी है.
दरअसल, ये सारा झमेला नियम बनाते समय हुई एक चूक से पैदा हुआ है. आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 24 के अनुसार, रिजर्व बैंक को सभी तरह के नोट छापने के आधिकार दिए गए हैं. इसके तहत आरबीआई 2, 5, 10, 20, 50, 100, 500 और 2000, 5000, 10000 या इससे ज्यादा मूल्य के नोट छाप सकता है. लेकिन, इस पूरे कानून में कहीं भी 1 रुपये का जिक्र नहीं किया गया. इसकी वजह तब तक 1 रुपये के नोटों की छपाई बंद होना भी हो सकती है. दरअसल, भारत में 1 रुपये नोट पहली बार 30 नवंबर, 1917 को छापा गया और फिर इसे 1026 में बंद कर दिया गया. आरबीआई अधिनियम को 1934 में बनाया गया जब 1 रुपये के नोट की छपाई बंद थी. हो सकता है इसी कारण इसका जिक नहीं किया गया. बाद में 1940 में फिर 1 रुपये के नोट की छपाई शुरू हो गई.
अब जबकि 1 रुपये का नोट रिजर्व बैंक के छपाई नियमों से बाहर चला गया तो इसका जिम्मा सरकार ने लिया है. तभी से 1 रुपये और उसके सिक्के (One Rupee Coin) की छपाई और ढलाई का काम वित्त मंत्रालय ही देख रहा है. इस पर दस्तखत भी गवर्नर के बजाए वित्त सचिव के होते हैं. चूंकि, यह वित्त मंत्रालय के अधीन आता है लिहाजा इसकी देखरेख का जिम्मा वित्त सचिव के पास है और उन्हीं की निगरानी में 1 रुपये के नोट और सिक्के की छपाई होती है.
भले ही 1 रुपये के नोट और सिक्के की छपाई वित्त मंत्रालय करता है, लेकिन बाजार में इसके सर्कुलेशन और प्रबंधन का जिम्मा रिजर्व बैंक के कंधे पर ही होता है. यह नोट कई मायनों में अन्य से अलग और खास है. रिजर्व बैंक के सभी नोट पर जहां ‘मैं धारक को …रुपये अदा करने का वचन देता हूं’ लिखा होता है, लेकिन 1 रुपये के नोट पर ऐसा कुछ नहीं लिखा होता. इतना ही नहीं 1 रुपये के नोट पर सिल्वर लाइन भी नहीं होती है.
1 रुपये का सिक्का और नोट पहली बार बाजार में आने के बाद से कई बार धक्के खा चुका है, लेकिन अभी तक डटा है. इससे पहले सरकार और आरबीआई 10 हजार, 5 हजार, 1 हजार के नोट बंद कर चुके हैं, जो अब पूरी तरह चलन से बाहर भी हो गए. उधर, 1 रुपये के नोट की छपाई को पहली बार 1926 में और दूसरी बाद 1994 में बंद किया गया. बावजूद इसके यह वापस बाजार में आ धमकता है और अपनी शुरुआत के बाद से आज तक बाजार से आउट नहीं हुआ है.