प्रोपर्टी खरीदने से पहले जान ले कौनसे डॉक्यूमेंट हैं सबसे जरूरी, नहीं तो खा जाएंगा धोखा

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Jambhsar Media Digital Desk : अगर आप भी प्रोपर्टी खरीदने की प्लानिंग कर रहे है तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल आज हम आपको अपनी इस खबर में ये बताने जा रहे है कि आखिर प्रोपर्टी की रजिस्ट्री के लिए कौन से डॉक्यूेंट सबसे जरूरी है…नहीं तो आप भी खा सकते है धोखा। 

घर खरीदना हर किसी का सपना होता है। लेकिन प्रॉपर्टी खरीदते वक्त जरा सी लापरवाही आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। थाने से लेकर कोर्ट तक के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। ऐसे में बेहतर है कि घर या कोई दूसरी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले तमाम जरूरी चीजों की बारीकी से जांच कर लें। आइये आपको बताते हैं कि प्रॉपर्टी का सौदा फाइनल करने से लेकर रजिस्ट्री तक किन चीजों का ध्यान रखना अनिवार्य है…

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1- किसी भी प्रॉपर्टी की डीड दो तरीके से होती है। पहला हम सीधे किसी डीड राइटर या एडवोकेट से मिलकर अपने ट्रांजैक्शन के बारे में बताते हैं और डीड तैयार करवा कर रजिस्ट्री करवाते हैं। दूसरा- हम किसी प्रॉपर्टी डीलर के जरिए सारा काम करवाते हैं, जिसमें डीड बनवाने का काम भी प्रॉपर्टी डीलर ही करता है। दोनों में से कोई भी परिस्थिति हो, लेकिन ध्यान रखें कि डीड प्रॉपर्टी रजिस्टर कराने से चार-पांच दिन पहले ही तैयार करवा लें।

कई बार डीड राइटर सिर्फ नाम-पता जैसी चीजें बदल कर पिछली रजिस्ट्री को ही कॉपी पेस्ट कर देते हैं और रजिस्ट्री तैयार कर देते हैं। अगर रजिस्ट्री में कोई डिटेल गलत दर्ज हो गई तो भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बेहतर है डीड 4-5 दिन पहले तैयार करवा लें और एक-एक चीज चेक कर लें।

2- डीड में प्रॉपर्टी की डिटेल को बारीकी से चेक करें। चेक करें की प्रॉपर्टी का दाखिल-खारिज उस शख्स के नाम है जो आपको प्रॉपर्टी बेच रहा है। दूसरा- जो मेजरमेंट और चौहद्दी अंकित है वह सही होनी चाहिए। अगर आपको डीड की कोई बात समझ नहीं आ रही है तो किसी एडवोकेट की मदद ले सकते हैं।

3- डीड पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी का कैलकुलेशन भी कुछ दिन पहले ध्यान से कर लेना चाहिए। चर्चित एडवोकेट नरेश कुदाल अपने एक वीडियो में कहते हैं कि टाइटल डीड बनवाते समय हमें हमेशा ध्यान देना चाहिए कि भले ही स्टांप ड्यूटी थोड़ा ज्यादा लग जाए लेकिन डॉक्यूमेंटेशन प्रॉपर होना चाहिए। कई बार, लोग डीड में गलत फैक्ट लिखकर स्टांप ड्यूटी बचाने का प्रयास करते हैं लेकिन इसकी रिकवरी भी निकाली जा सकती है। इसलिए बेहतर है कि पहली बार में ही सही जानकारी दें।

4- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस प्रॉपर्टी की आप रजिस्ट्री कराने जा रहे हैं उसके टाइटल की जांच करना बहुत जरूरी है। इसके लिए कभी भी रजिस्ट्री वाले दिन का इंतजार नहीं करना चाहिए। जिस डीलर या सेलर के जरिए आप डील कर रहे हैं उससे प्रॉपर्टी के सारे टाइटल के पेपर की कॉपी मांगनी चाहिए। उन पेपर्स को ध्यान से देखना चाहिए कि टाइटल चेन पूरी है या नहीं।

डीलर या सेलर से यह भी पूछना चाहिए कि क्या उसके पास सारे डॉक्यूमेंट की ओरिजिनल कॉपी उपलब्ध है या नहीं। अगर नहीं है तो उसका क्या रीजन है और क्या पुलिस में कोई गुमशुदगी दर्ज कराई है। एडवोकेट कुदाल कहते हैं कि अगर आपको पेपर्स में जरा सा भी शंका लगे तो एडवोकेट से संपर्क करें।

5- रजिस्ट्री से पहले ही चेक करें कि जो प्रॉपर्टी आप खरीद रहे हैं उस पर क्या वास्तव में सेलर का पजेशन है या नहीं। कई बार ऐसी स्थिति होती है कि आपने प्रॉपर्टी खरीदी और जब पजेशन लेने गए तो वहां किसी और का कब्जा मिलता है। 100 रुपये के स्टांप पेपर पर पजेशन लेटर भी तैयार करवा लेंगे तो बेहतर होगा। इस पर बायर और सेलर दोनों के साइन होने चाहिए। पजेशन लेते वक्त वीडियो बना लेंगे तो और अच्छा होगा।

– प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के वक्त आपको सेलर से सभी ओरिजिनल पेपर लेने हैं। प्रॉपर्टी पेपर सुपुर्द करते वक्त 100 रुपये का स्टांप पेपर बनवा लेंगे तो बेहतर होगा।

– यह चेक करना भी बहुत जरूरी है कि जो प्रॉपर्टी आप खरीद रहे हैं उस पर किसी तरह का कोई लोन या किसी विभाग का कोई बकाया तो नहीं है। जैसे हाउस टैक्स, बिजली, पानी, टेलीफोन ब्रॉडबैंड जैसे बिल। रजिस्ट्री के वक्त आपक इनके ताजा बिल की कॉपी भी ले लेनी चाहिए।

– जब आप कोई प्रॉपर्टी रजिस्टर करवाते हैं तो उसमें कम से कम 2 विटनेस यानी गवाह की जरूरत होती है। इन विटनेस के साइन भी डॉक्यूमेंट पर होते हैं और सब रजिस्ट्रार ऑफिस में उनके बायोमेट्रिक भी दर्ज होते हैं। तमाम लोग विटनेस वाले विषय को गंभीरता से नहीं लेते हैं। कई बार तो प्रॉपर्टी डीलर या डीड राइटर को ही विटनेस बना साइन करवा देते हैं। अगर भविष्य में कभी आवश्यकता पड़ी तो ऐसे विटनेस आपके काम नहीं आएंगे। इसलिए हमेशा ध्यान रखें विटनेस के रूप में ऐसे शख्स को रखें जो जरूरत पड़ने पर कोर्ट में गवाही दे सके।

– यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि अपने किसी करीबी रिश्तेदार को विटनेस न बनाएं को क्योंकि कभी मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट ऐसे विटनेस को हितवाद मानता है।

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Rameshwari Bishnoi

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