Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्ली: राजस्थान में ऊगने वाली हरि पत्तेदार सब्जियां अपने औषधिय और आयुर्वेदिक गुणों के लिए काफी मशहूर हैं. इन बेशकीमती हरि पत्तेदार सब्जियों की सर्दियों के मौसम में ना सिर्फ भरमार रहती है, बल्कि जबरदस्त डिमांड भी रहती है. आज हम सोगरी के फली की बात कर रहे हैं, जिसमें दिलचस्प बात ये है कि सोगरी की फली से लेकर जड़ और पत्तों तक का काफी महत्व है और इन्हें कच्चा सलाद और सब्जी के रूप में ही नहीं, बल्कि पराठे भी बनाकर हम खा सकते हैं.
सोगरी की फली किसी पेड़ या बेल पर नहीं, बल्कि मूली के ऊपर लगती है.आसान भाषा मे समझे, तो जमीन में मूली उगती है और ऊपर मूली के पत्ते निकलते हैं. इसके पकने के बाद इन पत्तों में ये सोगरी की फली निकलती है. वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संजय तंवर बताते हैं कि मूली की तासीर ठंडी रहती है, जिसे आप कच्चा या पकाकर खा सकते हैं. मूली के पत्तों का भी आप सब्जी में उपयोग कर सकते हैं. पत्तों के पकने के बाद उनपर आने वाली सोगरी की फली को कच्चा सलाद के रूप में भी खा सकते है. साथ ही साथ सब्जी या बुजी बनाकर भी इसका स्वाद चख सकते है.
डॉ. संजय तंवर बताते हैं कि सोगरी कि सब्जी बहुत फायदेमंद होती है. ये खाने से बड़ी-बड़ी बीमारियां, खांसी, गठिया जैसी बीमारी को ठीक करने में मदद मिलती है. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व कैलोरी, सोडियम, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम जैसे कई तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. तंवर कहते हैं कि सोगरी की सब्जी की पौष्टिकता सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है. इसे कई तरीकों से बनाया जाता है और खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होता है. इसे राजस्थान के लोग काफी ज्यादा पसंद करते हैं.
सोगरी की फली में विटामिन सी, फोलेट, मैग्नीशियम, फास्फोरस, मैंगनीज और प्रोटीन सहित आवश्यक पोषक तत्वों का एक पावरहाउस है और इनमें कैलोरी भी कम होती है. एक कप में केवल 16 कैलोरी होती है. सोगरी की फली में फ्लेवोनोइड्स होते हैं, जो उच्च रक्तचाप, दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं.








