बूंदी | राजस्थान के बूंदी जिले में गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित अन्नपूर्णा रसोई योजना में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। देवपुरा स्थित अन्नपूर्णा रसोई और आश्रय स्थल का संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने औचक निरीक्षण किया, जिसमें योजना के संचालन में कई बड़ी खामियां उजागर हुईं। निरीक्षण के दौरान भोजन वितरण के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर पाया गया, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका गहरा गई है।
रिकॉर्ड और वास्तविकता में बड़ा अंतर
रसोई के दस्तावेजों में उस दिन 96 लोगों को भोजन कराए जाने का उल्लेख दर्ज था। लेकिन जब मौके पर निरीक्षण किया गया तो केवल 19 थालियां ही उपयोग में पाई गईं। यह अंतर देखकर संभागीय आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर लापरवाही और संभावित गड़बड़ी माना। अधिकारियों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में कूपन काटे गए हैं तो उनका वास्तविक उपयोग किसके नाम पर हुआ, इसकी जांच जरूरी है।
रसोई की व्यवस्थाएं भी मिली खराब
निरीक्षण के दौरान रसोई परिसर की साफ-सफाई भी संतोषजनक नहीं मिली। वहां जगह-जगह गंदगी पाई गई और बुनियादी व्यवस्थाओं का भी अभाव नजर आया। रसोई में न तो निर्धारित मीनू कार्ड लगाया गया था और न ही गर्मी के मौसम को देखते हुए पंखों की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। इससे योजना की गुणवत्ता और संचालन पर सवाल खड़े हो गए।

भोजन की मात्रा भी संदिग्ध
तहसीलदार अर्जुन लाल के अनुसार मौके पर लगभग 15 लोग भोजन करते हुए मिले, जबकि दो लोग खाना खा रहे थे और दो थालियां खाली पड़ी थीं। रसोई में जांच के दौरान दाल की मात्रा भी बहुत कम मिली और चावल उपलब्ध नहीं थे। मीनू चार्ट के अनुसार भोजन परोसे जाने की व्यवस्था भी नहीं थी और लोगों को अचार जैसी अतिरिक्त सामग्री भी नहीं दी गई थी। रसोई में कुल मिलाकर करीब 20 थालियां ही मौजूद थीं, जबकि रिकॉर्ड में 96 लोगों को भोजन कराने की एंट्री दर्ज की गई थी।
आश्रय स्थल में भी सामने आई अव्यवस्था
संभागीय आयुक्त ने पास में स्थित आश्रय स्थल का भी निरीक्षण किया। वहां भी कई कमियां देखने को मिलीं। कुछ कमरों में पंखे चल रहे थे, जबकि वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। गार्ड की व्यवस्था नहीं थी और बिस्तर भी साफ नहीं मिले। बिजली के उपकरण भी बिना उपयोग के चालू अवस्था में पाए गए। इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने जिम्मेदार कर्मचारियों से जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका।
संबंधित फर्म पर कार्रवाई की तैयारी
नगर परिषद बूंदी के सहायक अभियंता दिनेश मीना ने बताया कि अन्नपूर्णा रसोई का कार्यभार उन्हें हाल ही में मिला है और उन्हें निरीक्षण की पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित फर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें फर्म को ब्लैकलिस्ट करना और भुगतान रोकना भी शामिल हो सकता है।
कूपन की जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए संभागीय आयुक्त ने जिला प्रशासन को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि काटे गए कूपनों की डिजिटल जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने लोगों को भोजन मिला और कितने कूपन गलत तरीके से दर्ज किए गए।
प्रशासन का कहना है कि यदि योजना में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि अन्नपूर्णा रसोई जैसी जनहितकारी योजना का लाभ सही मायनों में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।








