अप्रैल 2026 में देश की प्रमुख आईवियर कंपनी Lenskart अचानक एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई। मामला कंपनी की कथित इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी से जुड़ा था, जिसमें कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों को लेकर सवाल उठे। सोशल मीडिया पर जैसे ही यह मुद्दा वायरल हुआ, विरोध शुरू हो गया और #BoycottLenskart ट्रेंड करने लगा।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एक पुरानी ड्रेस कोड गाइडलाइन सामने आई। इसमें दावा किया गया कि कुछ धार्मिक प्रतीकों जैसे बिंदी और तिलक पर रोक थी, जबकि अन्य प्रतीकों को अनुमति दी गई थी। इस कथित असमानता को लेकर लोगों में नाराजगी फैल गई। कई यूज़र्स ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कंपनी की आलोचना की।
CEO का बयान और कंपनी का यू-टर्न
विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal सामने आए और उन्होंने सफाई देते हुए माफी मांगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के भेदभाव का समर्थन नहीं करती। इसके बाद तुरंत नई गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें सभी कर्मचारियों को अपनी धार्मिक पहचान के प्रतीक पहनने की अनुमति दे दी गई।
नई नीति के अनुसार अब कर्मचारी बिंदी, तिलक, हिजाब, कड़ा, पगड़ी, सिंदूर जैसे पारंपरिक प्रतीकों के साथ काम कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि यह नीति उसके सभी 2400 से अधिक स्टोर्स पर लागू होगी।
सोशल मीडिया का असर और आर्थिक झटका
सोशल मीडिया पर चले विरोध अभियान का असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी दिखाई दिया। खबरों के मुताबिक, इस विवाद के चलते कंपनी के शेयरों में 3 से 5 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। इससे कंपनी के कुल वैल्यूएशन में हजारों करोड़ रुपये की कमी आई।
यह घटना दिखाती है कि आज के समय में सोशल मीडिया का प्रभाव कितना बड़ा हो गया है, जहां किसी भी मुद्दे पर तेजी से जनमत बनता है और कंपनियों को तुरंत प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।
सूरत में विरोध प्रदर्शन
विवाद केवल ऑनलाइन तक सीमित नहीं रहा। Surat में कुछ संगठनों ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कर्मचारियों पर धार्मिक प्रतीकों को हटाने का दबाव बनाया गया था। इस घटना ने विवाद को और अधिक तूल दे दिया।
टेक्नोलॉजी में आगे, लेकिन विवाद में घिरी कंपनी
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में कंपनी ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया था। दिसंबर 2025 में Google के साथ मिलकर AI आधारित स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च करने की घोषणा की गई थी, जिनमें वॉयस कमांड और UPI पेमेंट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
लेंसकार्ट का यह विवाद कॉर्पोरेट नीतियों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है। कंपनी ने तेजी से अपनी नीति में बदलाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि भारत जैसे विविधता वाले देश में किसी भी ब्रांड के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सावधानी बेहद जरूरी है।








