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93% अंक लाकर भी अधूरी रह गई खुशी—श्रीगंगानगर की निकिता रिजल्ट से पहले ही दुनिया छोड़ गई...

निकिता 12वीं रिजल्ट ,श्रीगंगानगर खबर ,RBSE 12वीं रिजल्ट 2026 ,93.80% छात्रा निधन ,बीमार छात्रा की सफलता
निकिता 12वीं रिजल्ट ,श्रीगंगानगर खबर ,RBSE 12वीं रिजल्ट 2026 ,93.80% छात्रा निधन ,बीमार छात्रा की सफलता

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। 12वीं बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाली एक होनहार छात्रा निकिता अब इस दुनिया में नहीं रही। विडंबना यह रही कि जिस रिजल्ट का उसे और उसके परिवार को बेसब्री से इंतजार था, वह आने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गई।

बीमारी के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई

निकिता राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं (आर्ट्स स्ट्रीम) की छात्रा थी और 7 केएन रावला स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ती थी।
परिजनों के अनुसार, वह लंबे समय से बीमार थी। उसे पीलिया या तेज बुखार जैसी गंभीर समस्या थी, लेकिन पढ़ाई के प्रति उसका समर्पण कम नहीं हुआ।

मां ने बताया कि निकिता कई बार दवाइयां और इंजेक्शन लेकर ही परीक्षा देने जाती थी। उसकी एक ही जिद थी—“परीक्षा अच्छे से देनी है और अच्छे अंक लाने हैं।”

20 मार्च को हुआ निधन

परीक्षाओं के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और आखिरकार 20 मार्च को उसने दम तोड़ दिया। परिवार उस समय गहरे सदमे में था, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि उनकी बेटी ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया होगा।

31 मार्च को आया रिजल्ट, लेकिन देखने वाली नहीं रही

जब 31 मार्च 2026 को बोर्ड का परिणाम घोषित हुआ, तो निकिता ने 93.80% से अधिक अंक हासिल कर शानदार सफलता प्राप्त की। कुछ रिपोर्ट्स में यह प्रतिशत 93.88% तक बताया गया है।
यह परिणाम यह साबित करता है कि वह एक मेधावी और मेहनती छात्रा थी।

लेकिन यह सफलता अब केवल एक याद बनकर रह गई, क्योंकि उसे देखने के लिए निकिता इस दुनिया में मौजूद नहीं थी।

खुशियों के दिन घर में पसरा सन्नाटा

जहां एक ओर पूरे प्रदेश में रिजल्ट को लेकर जश्न का माहौल था, वहीं निकिता के घर में मातम छाया रहा।
मां अपनी बेटी की तस्वीर को सीने से लगाकर रोती रही। परिवार के लोग बार-बार यही कहते नजर आए कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी मेहनत करने वाली बेटी रिजल्ट देखने के लिए उनके बीच नहीं रहेगी।

मेहनत और हौसले की मिसाल बनी निकिता

निकिता की कहानी सिर्फ एक दुखद घटना नहीं, बल्कि संघर्ष और जुनून की मिसाल भी है।
गंभीर बीमारी के बावजूद उसने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं।

समाज के लिए एक भावुक संदेश

यह घटना हर किसी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन कितना अनिश्चित है।
निकिता ने अपने छोटे से जीवन में जो उपलब्धि हासिल की, वह हमेशा प्रेरणा देती रहेगी, लेकिन उसकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

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