नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत के सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरावट के बाद शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी कमी दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों और ग्राहकों के बीच हलचल तेज हो गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को 24 कैरेट सोने की कीमत में 2,490 रुपए की गिरावट आई है। इसके बाद 10 ग्राम सोना घटकर करीब 1.44 लाख रुपए पर पहुंच गया। इससे पहले भी सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया था, लेकिन अब गिरावट का ट्रेंड लगातार बना हुआ है।
वहीं चांदी की बात करें तो इसमें और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एक ही दिन में चांदी करीब 9,000 रुपए सस्ती हो गई है। इससे चांदी के दाम तेजी से नीचे फिसलते हुए निवेशकों के लिए चिंता और अवसर दोनों पैदा कर रहे हैं।
28 दिनों में भारी गिरावट
पिछले करीब 28 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोना करीब 15,000 रुपए तक सस्ता हो चुका है। वहीं चांदी में तो और भी ज्यादा गिरावट आई है, जो लगभग 41,000 रुपए तक नीचे आ चुकी है। यह गिरावट दर्शाती है कि बाजार में फिलहाल अनिश्चितता और दबाव बना हुआ है।
गिरावट के पीछे क्या कारण हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान युद्ध के चलते शुरुआत में सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना गया था, जिससे कीमतें बढ़ी थीं। लेकिन अब जैसे-जैसे वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव आ रहा है, निवेशक मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग में कमी भी कीमतों में गिरावट का बड़ा कारण मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है, लेकिन निवेश से पहले बाजार की स्थिति और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में ईरान युद्ध और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतकों के आधार पर सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आम ग्राहकों को राहत
सोने और चांदी के दाम घटने से आम ग्राहकों को भी राहत मिली है। शादी-ब्याह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए खरीदारी करने वालों के लिए यह समय फायदेमंद साबित हो सकता है।
ईरान युद्ध के बीच सोने-चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट बाजार की अस्थिरता को दर्शाती है। निवेशकों और ग्राहकों के लिए यह समय सावधानी के साथ फैसले लेने का है, क्योंकि आने वाले दिनों में बाजार का रुख पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।








