मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के करीब 20% तेल का परिवहन होता है। इसके बंद होते ही भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।
भारत के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, वहीं एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। हालात को देखते हुए एलपीजी से जुड़े नियमों में भी तेजी से बदलाव किए गए हैं ताकि वितरण को नियंत्रित किया जा सके।
पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत
ऊर्जा संकट का असर आम लोगों पर साफ दिखाई दे रहा है।
पेट्रोल पंपों पर भीड़ और लंबी लाइनें
एलपीजी सिलेंडर की कमी
कई जगहों पर कीमतों में बढ़ोतरी
कई देशों ने इस स्थिति को देखते हुए ऊर्जा आपातकाल तक घोषित कर दिया है। भारत में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
भारत का बड़ा फैसला: रूस से तेल की रिकॉर्ड खरीद
संकट से निपटने के लिए भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए Russia से 6 करोड़ टन (60 मिलियन टन) कच्चा तेल खरीदने का ऑर्डर दिया है।
यह खरीद फरवरी के मुकाबले लगभग दोगुनी बताई जा रही है
तेल की आपूर्ति अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद
प्रति बैरल 5 से 15 डॉलर प्रीमियम पर डील

यह कदम भारत की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिका की नीति में बदलाव
United States और पश्चिमी देशों ने पहले रूस पर प्रतिबंध लगाए थे, खासकर Russia-Ukraine War के बाद।
हालांकि, होर्मुज संकट के चलते अमेरिका ने अस्थायी रूप से रूस और ईरान के तेल पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है। इससे भारत को रूस से बड़े स्तर पर तेल खरीदने का मौका मिला है।
भारत बना रूस का बड़ा खरीदार
इस मौके का फायदा उठाते हुए भारत तेजी से रूस का प्रमुख तेल खरीदार बन रहा है।
भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई
रूस ने बढ़ती मांग के कारण छूट (discount) कम कर दी
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल
कई देशों से तेल खरीदकर संतुलन बनाने की कोशिश
भारत केवल रूस पर निर्भर नहीं है, बल्कि 40 से अधिक देशों से तेल आयात कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
Saudi Arabia
United Arab Emirates
Qatar
Venezuela
United States
इस रणनीति से भारत सप्लाई चेन को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
जब तक Iran होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोलता, तब तक वैश्विक ऊर्जा संकट बने रहने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
सप्लाई चेन पर दबाव बना रहेगा
भारत को वैकल्पिक स्रोतों पर और निर्भर होना पड़ेगा
होर्मुज संकट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक राजनीति का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है। भारत ने रूस से बड़ी तेल खरीद कर तत्काल राहत का रास्ता जरूर खोज लिया है, लेकिन जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक पेट्रोल-डीजल और गैस को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।








