Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्ली: हाल ही में इनकम टैक्स विभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि आइटीआर भरने की आखिरी तारिक भी जा चुकी है, जिसे देखकर इनकम विभाग 7 तरह के नोटिस भेज रहा है। आइए विस्तार से जानते है इस खबर के बारे में…
ये तो सभी को पता है कि आईटीआर में कोई कमी पाए जानें पर आयकर विभाग (Income tax department) की तरफ से नोटिस भेजा जाता है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि ये नोटिस कई तरह के होते हैं.अगर आपकी आय और टैक्स में कोई अंतर दिखता है तो भी नोटिस आ सकता है. गलती से कोई चीज गलत रह गई हो तो भी नोटिस आ जाता है. आइए जानते हैं आयकर विभाग के तमाम नोटिसों के बारे में…
बता दें कि आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा 31 जुलाई 2023 थी. आपके आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के बाद आयकर विभाग आपके द्वारा भुगतान किए गए कर की समीक्षा करेगा.
यदि भुगतान किया गया कर करदाता को देय राशि से कम पाया जाता है या यदि विभाग को कोई त्रुटि मिलती है तो विभाग आपको इन धाराओं के अनुसार नोटिस भेज सकता है.
Section 133A के तहत अकाउंट्स के सर्वे या स्क्रूटिनी के लिए नोटिस जारी किया जाता है.
आयकर अधिनियम के Section 131(1A) के तहत एक असेसिंग ऑफिसर को अधिकार है कि वह इस बात पर शक कर सके कि करदाता ने कुछ आय छुपाई है. यानी आपको ये नोटिस आने पर इस बात के सबूत देने होंगे कि आपने कोई इनकम नहीं छुपाई है.
Section 143(1) के तहत आने वाला नोटिस तब आता है जब ये पाया जाता है कि टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए कोई गलती हुई है या फिर कोई गलत जानकारी दी गई है. ऐसी सूरत में अतिरिक्त टैक्स डिमांड की जाती है.
एक टैक्सपेयर्स, जिसने धारा 139 या 142(1) के तहत रिटर्न भरा है. उसे आयकर अधिनियम की धारा 143(2) के तहत नोटिस दिया जा सकता है. अगर मूल्यांकन अधिकारी (एओ) को लगता है कि टैक्सपेयर्स ने कुछ गलत जानकारी शेयर की है या फिर आय से संबंधित कोई जानकारी देने में चूक हुई है तो वह नोटिस भेज सकता है.
Section 148 का नोटिस तब आएगा, जब असेसिंग ऑफिसर को लगेगा कि आपकी कुछ आय का मूल्यांकन नहीं हुआ है, ऐसी स्थिति में फिर से मूल्यांकन किया जा सकता है.
अगर करदाता की तरफ से कोई टैक्स, ब्याज, हर्जाना आदि ड्यू रह जाता है तो उसे Section 156 के तहत नोटिस जारी कर के भुगतान करने के लिए कहा जा सकता है.








