फलोदी के चाखु थाना में कार्यरत हेड कांस्टेबल चेनाराम ने थाने में बने पानी के टांके में कूदकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वो कुछ दिनों से अवसाद से ग्रस्त थे। इस मामले के बाद फलोदी के एसपी विनीत बंसल की मॉनिटरिंग में जांच शुरू कर दी गई है। घटना के बारे में अभी विस्तृत जानकारी पुलिस द्वारा साझा नहीं की गई है।
बाना का बास, तिवरी निवासी चेनाराम हेड कांस्टेबल की पोस्ट पर फलोदी जिले के चाखु थाने में कार्यरत थे। रेपोर्ट्स के मुताबिक उनको कुछ दिनों से किसी बात का तनाव था जिसके कारण उन्हें आत्महत्या जैसा दुखद कदम उठाना पड़ा। पुलिस अभी आत्महत्या के पीछे के कारणों को जानने में लगी हुई है।
हेड कांस्टेबल चेनाराम के तनाव के पीछे के कारणों में दो दिन पहले ओसियां पुलिस द्वारा उनके बेटे और तिवरी के उपप्रधान खेमाराम को जबरदस्ती पुलिस द्वारा गिरफ्तार करना बताया जा रहा है। दो दिन पहले बाना का बास (तिवरी पंचायत समिति) में विभिन्न कार्यों का लोकार्पण करने के लिए स्थानीय विधायक दिव्या मदेरणा आई थी। बताया जा रहा है, इससे पहले खेमाराम ने लोकार्पण पट्ट पर स्थानीय सरपंच का नाम न लिखवाने को लेकर काँग्रेस विधायक की आलोचना की थी। जिसके बाद दिव्या मदेरणा के आगमन से पहले पुलिस ने कार्यक्रम स्थल से उपप्रधान खेमाराम को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी।
फिर जब ग्रामीण लोगों ने पुलिस का विरोध किया और कार्यक्रम छोड़कर जाने लगे तब जाकर पुलिस पीछे हटी और दिव्या मदेरणा के आने का इंतजार किया। कार्यक्रम समापन के बाद फिर से पुलिस ने किसी की न सुनते हुए खेमाराम को गिरफ्तार करके ओसियां पुलिस थाना ले गए।
ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा ने उपप्रधान पर कार्यक्रम में विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। इस बीच, पूर्व विधायक और संसदीय सचिव भैराराम सियोल ने दावा किया कि पुलिस विधायक के दबाव के आगे झुक रही है। उपप्रधान भी एक चुना हुआ प्रतिनिधि होता है और उसके गांव में निर्माण कार्य कराया गया। सरकारी प्रोटोकॉल के मुताबिक शिलान्यास पर गांव के सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों का नाम अंकित होना चाहिए। हालांकि, विधायक ने सिर्फ उनका और जिला परिषद प्रमुख का ही नाम शामिल किया। आपत्ति जताने पर विवाद हो गया और पुलिस उपप्रधान को थाने ले गयी।
हालांकि बाद में जब लोगों और जनप्रतिनिधियों ने ओसियां थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया जिसके बाद खेमाराम को छोड़ दिया गया था। लेकिन कहीं न कहीं द्वेष की भावना में आकर पुलिस द्वारा अपने बेटे को गिरफ्तार करने की बात हेड कांस्टेबल चेनाराम के तनाव का कारण बनी होगी। या फिर उनके स्ट्रेस का कोई और कारण रहा होगा, यह तो जांच का विषय है ही।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि “जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है, सरकार पुलिस बल का नाजायज प्रयोग कर रही है और द्वेष भावना रखते हुए जिसको चाहे उसे बिना किसी अपराध के उठा लेती है। विपक्षी पार्टी के समर्थकों को परेशान किया जा रहा है और बीजेपी के समर्थन में बात रखने वाले कई किसानों के ट्रांसफोरमर्स सरकार के अधिकारी उठा ले जाते है।” इस तरह की राजनीति का राजस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। क्योंकि राजस्थान में सत्ता क हस्तानान्तरण तो हर पाँच साल में होता ही है, ऐसी द्वेष की राजनीति राजस्थान ने पहले कभी नहीं देखी थी।








