जोधपुर। सुरक्षा बलों में भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने फर्जी पहचान के जरिए भर्ती में शामिल होने की कोशिश की। मामला जोधपुर स्थित बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) ट्रेनिंग सेंटर का है, जहां सतर्कता के चलते पूरी साजिश का खुलासा हो गया।
जानकारी के अनुसार, एक युवक खुद को एसएससी-2025 में चयनित अभ्यर्थी बताकर ट्रेनिंग सेंटर में रिपोर्टिंग के लिए पहुंचा था। उसने अपनी पहचान अमन सोनी के रूप में बताई और जरूरी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन जैसे ही बायोमेट्रिक सत्यापन और फोटो मिलान की प्रक्रिया शुरू हुई, उसकी पहचान संदिग्ध लगने लगी।
बायोमेट्रिक जांच में खुली पोल
अधिकारियों द्वारा किए गए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में युवक की उंगलियों के निशान और रिकॉर्ड में दर्ज डाटा मेल नहीं खाया। यही नहीं, फोटो मिलान में भी स्पष्ट अंतर नजर आया। गहन जांच के दौरान सामने आया कि युवक ने पहचान छिपाने के लिए जाली अंगूठे के निशान का सहारा लिया था, जिससे वह सिस्टम को धोखा देने की कोशिश कर रहा था।
पूछताछ में सामने आई असली पहचान
सख्ती से पूछताछ करने पर युवक ने अपनी असली पहचान उजागर की। उसने अपना नाम संजय कुमार बताया, जो उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद का रहने वाला है। उसके पास से मिले दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, जिनमें फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है।
गिरोह की आशंका, जांच जारी
बीएसएफ अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए युवक को हिरासत में ले लिया और स्थानीय पुलिस को सौंप दिया। पुलिस अब इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो काम नहीं कर रहा, जो फर्जी अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में घुसाने की साजिश रचता हो।
भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रियाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, समय रहते फर्जी अभ्यर्थी का पकड़ा जाना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को भी दर्शाता है।
प्राथमिक जांच में यह साफ हो गया है कि युवक ने योजनाबद्ध तरीके से सिस्टम को धोखा देने की कोशिश की थी, लेकिन आधुनिक तकनीक और सतर्कता के चलते उसका प्रयास विफल हो गया। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।








