Jambhsar Media Digital Desk : काले सोने (अफीम की फसल) पर तस्करों की नजर तो अब आम बात हो गई है पर काले सोने पर हरे लुटेरों की नजर हो तो बात कुछ अटपटी सी लगती है पर यह सच है। दरअसल, खेतों पर लहलहा रही अफीम की फसल पर अब तोते मंडरा रहे हैं। घबराए किसान परिवार अफीम की फसल पा नेट का जाल बिछाकर तोतों से बचाव कर रहे हैं।
आमतौर पर आपने देखा होगा कि कई लोग अफीम का नशा करने के आदी होते हैं। लेकिन, यह कम ही लोग जानते है कि तोता एक ऐसा पक्षी है जो अफीम को चाव से खाता है। एक बार तोता यदि अफीम के डोडे का मादक दूध चख ले तो वह इसका आदी हो जाता है। इंसान के कदमों की आहट से ही उड़ जाने वाला यह पक्षी पास आकर भगाने पर भी अफीम के पौधे से नहीं उड़ता। जिले में इस सूय अफीम की फसल आखिरी दौर में है। क्षेत्र में डोडे से अफीम निकालने का काम चल रहा है। लेकिन, इसके साथ ही किसानों को नशेड़ी तोतों ने खासा परेशान कर रखा है। ये खेत में डोडे से अफीम खा रहे हैं।
मेवाड़ और मालवा में अफीम की खेती बड़ी मात्रा में होती है। किसानों के सामने मौसम की मार के बाद तोतों से फसल को भारी नुकसान हो रहा है। उप निदेशक उद्यान डॉ. शंकरलाल जाट ने बताया कि अधिकांश किसानों ने अफीम की फसल को जाली से कवर की हुई है। ताकि, अफीम के दूध को तोतों से बचाया जा सके। अफीम की फसल पर मण्डरा रहे तोतों ने किसानों की सतर्कता बढ़ा दी है।








