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Rajasthan News: अब सरकारी स्कूल में बच्चे नहीं बोलेंगे Good Morning Sir, जय रामजी के नाम से होगी क्लास की शुरुआत

Rajasthan News: अब सरकारी स्कूल में बच्चे नहीं बोलेंगे Good Morning Sir, जय रामजी के नाम से होगी क्ल
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Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्‍ली: आगामी नए शिक्षा सत्र में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी किताबों की जगह चौपड़ियां, पेेंसिल की जगह सीसपेण, वहीं नमस्ते-गुड मोर्निंग की जगह अभिवादन में जै रामजी कहते मिलेंगे।

आगामी नए शिक्षा सत्र में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी किताबों की जगह चौपड़ियां, पेेंसिल की जगह सीसपेण, वहीं नमस्ते-गुड मोर्निंग की जगह अभिवादन में जै रामजी कहते मिलेंगे। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-20 में आगामी नए शिक्षा सत्र से प्रदेश के जिलों में सरकारी विद्यालयों में कक्षा प्रथम से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को मारवाड़ी, थली, चौराई, ढारकी, सिलावटी, मोडवाड़ी, देवड़ावाटी, खेराड़ी, हाडौती, शेखावाटी, वांगड़ी आदि स्थानीय मातृभाषा में पढ़ाने की तैयारी में है।

शिक्षा विभाग ने इसके लिए प्रदेश के 9 जिलों में भाषायी सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। शेष जिलों में इसकी प्रक्रिया जारी है। भाषा बोलियों के जानकार अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दकोष के निर्माण कार्य में लगे हुए है। जिसमें फुटरो, राबड़ी, हबडको, छोरा-छोरी, वीद-वीदणी, अंगरकी, खाडका, हरपटिया, मेन मालिया, कूटणा, मोचो, डोंग, कागलों, धीणो, मारसा, खाटो, फटफटियों, तल्लियों री पेटी, समक, होंडो, भणकी, तोमड़ी, तगड़ी जैसे शब्द शामिल है। उम्मीद है कि इस प्रयोग से स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे में विश्वास जगेगा तथा बच्चों की स्कूलों में हिचकिचाहट खत्म हो सकेगी।

जापान, जर्मन एवं अन्य देशों की तर्ज पर प्राथमिक शिक्षा स्थानीय बोली में भाषायी सर्वेक्षण राजस्थान 23-24 अभियान को लेकर समसा एवं डाइट की ओर से जिला मुख्यालयों पर जिले के शिक्षाधिकारियों एवं प्रधानाचार्यों इत्यादि की कार्यशालाएं गत दिसम्बर माह में आयोजित हुई है।

जिले की सभी सरकारी स्कूलों में कार्यशालाओं के बाद भाषायी सर्वेक्षण का कार्य ऑनलाइन शाला दर्पण के माध्यम से कक्षा 1 से 5 के हिन्दी भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों पर यह सर्वेक्षण टूल प्रशासित किया गया। इस सर्वेक्षण उपकरण से घर की भाषा, परिवेश की भाषा, समूह साथी की भाषा, शिक्षक की भाषा बोलने व समझने को लेकर सर्वेक्षण किया गया। जो बहुभाषी शिक्षा नीति की तैयारी में काफी मदद मिलेगी व मददगार सिद्ध होगी।

जापान, जर्मन समेत अन्य देशों की तर्ज पर प्राथमिक शिक्षा वर्ग की कक्षाओं में मातृभाषा स्थानीय बोली में बच्चों को पढ़ाया जाता है तो बच्चे जल्दी समझ सकते है। यहां भी यह प्रयोग नीप-20 के तहत किया जा रहा है। सर्वेक्षण बाद बहुभाषा शिक्षा नीति तैयार करने में काफी मदद मिलेगी साथ ही प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को मातृभाषा सीखने का अवसर मिल सकेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-20 के तहत सरकारी विद्यालयों में आगामी सत्रों से कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को स्थानीय मातृभाषाओं में पढ़ाने की तैयारी को लेकर ब्लॉक में ऑनलाइन सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर दिया गया है। इस प्रयोग से बच्चों को स्कूलों में बोलने व समझने में आसानी होगी वहीं उनकी स्कूलों में हिचकिचाहट भी दूर होगी।

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