नागौर जिले के खींवसर उपखंड के आकला गांव में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। गांव के तालाब में डूबने से तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब चार दोस्त खेलते-खेलते तालाब की तरफ निकल गए थे। इस हादसे ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है, हर तरफ सिर्फ आंसू और मातम का माहौल है।
घटना का पूरा विवरण: खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गए मासूम
जानकारी के अनुसार, बुधवार, 2 जुलाई दोपहर को आकला गांव के चार बच्चे—जिनकी उम्र 8 से 12 वर्ष के बीच बताई जा रही है—गांव के पास स्थित तालाब की ओर खेलने के लिए गए थे। गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए तालाब और उसके किनारे खेलना आम बात है। लेकिन किसे पता था कि यह खेल उनकी जिंदगी का आखिरी खेल बन जाएगा।
तालाब के किनारे खेलते-खेलते तीन बच्चे पानी में उतर गए। बताया जा रहा है कि वे शायद तैरने की कोशिश कर रहे थे या फिर पानी में कुछ निकालने के चक्कर में गहराई में चले गए। देखते ही देखते तीनों बच्चे पानी में डूबने लगे। चौथा बच्चा, जो किनारे पर था, यह सब देखकर घबरा गया और तुरंत दौड़कर गांव पहुंचा।
साथी बालक ने दिखाई हिम्मत, परिजनों को दी सूचना
डूबते बच्चों को देखकर चौथे बच्चे ने समझदारी दिखाई और घबराए बिना सीधे गांव की ओर दौड़ा। उसने घर पहुंचकर अपने और बाकी बच्चों के परिजनों को पूरी घटना की सूचना दी। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर और साथी की बात सुनकर गांव में हड़कंप मच गया। परिजन, पड़ोसी और गांव के लोग तुरंत तालाब की ओर भागे।
तालाब में डूबे बच्चों को बचाने के लिए गांववालों ने तुरंत स्थानीय गोताखोरों को बुलाया। गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद तीनों बच्चों के शव तालाब से बाहर निकाले। इस दौरान तालाब के किनारे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के लोग भी बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

शवों को जिला चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया गया
घटना की सूचना मिलते ही खींवसर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने तीनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए नागौर जिला चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस ने घटना की पूरी जानकारी जुटाई और परिजनों के बयान लिए। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। तीन मासूमों की एक साथ मौत से आकला गांव में मातम छा गया है। गांव के हर घर में शोक की लहर है। स्कूल, रिश्तेदार और पड़ोसी सभी बच्चों की मासूमियत और उनकी मुस्कान को याद कर रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहली बार ऐसा मंजर देखा है, जब एक साथ तीन घरों के चिराग बुझ गए।
घटना के बाद से मृतक बच्चों के परिजनों की हालत बेहद खराब है। मां-बाप अपने जिगर के टुकड़ों को खोकर बेसुध हैं। गांव की महिलाएं परिजनों को ढांढस बंधाने में लगी हैं, लेकिन किसी के पास कोई शब्द नहीं हैं। बच्चों के दोस्त और स्कूल के साथी भी गहरे सदमे में हैं। गांव के सरपंच और पंचायत सदस्यों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब के आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
समाजसेवियों और प्रशासन से अपील
गांव के समाजसेवियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपील की है कि आकला गांव समेत आसपास के सभी तालाबों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। साथ ही, बच्चों के लिए सुरक्षित खेलने की जगहें बनाई जाएं, ताकि वे ऐसी दुर्घटनाओं से बच सकें। प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि जल्द ही तालाब के चारों ओर फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे।
आकला गांव में तीन मासूमों की तालाब में डूबने से हुई मौत ने पूरे नागौर जिले को झकझोर दिया है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज और प्रशासन को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
बच्चों की मासूमियत और उनकी हंसती-खेलती जिंदगी को यूं अचानक खत्म होते देखना हर किसी के लिए बेहद दर्दनाक है।
आइए, हम सब मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूक बनें और प्रशासन से भी अपील करें कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








