जब भी कोई पुलिस केस दर्ज होता है तो काम धंधे वाला इन्सान कोर्ट की तारीखों से डरता है और वो अपने मसले को समाजिक तरीके से हल करणा उचित समझता है ऐसा कई बार देखा जाता है लेकीन विशनोई समाज में अब सामाजिक इस्तर का न्याय भी तारीखों पर तारीख दे कर समाज को गुमरहा कर रहा है।
आपने कानूनी लड़ाई में कोर्ट की तारीखों को बदलते देखा और सुना होगा। लेकिन अब बिश्नोई समाज के धार्मिक और सामाजिक पंच पंचायती में खेल शुरू हो चुका है.
आपको बताते चले आज से करीब दो महीने पहले बिशनोई महासभा के संरक्षक कुलदीप बिशनोई के छोटे बेटे चैतन्य की दूसरे धर्म की लड़की से सगाई की खबर सोशल मीडिया के माध्यम से समाज के सामने आई थी। जिसको सामाजिक तौहीन समझा और विरोध शुरु हुआ
सामाजिक न्याय कि शुरुआत और उसका विरोध
समाज के ऐक वर्ग खासकर साधुओं में आक्रोश फैल गया था. हालाकि कानून के दायरे में ये रिश्ता लीगल है लेकीन समाजिक रूप से समाज के सबसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति का परिवार ऐसा करेगा तो सामाजिक मर्यादा खत्म होती है ऐसा उदाहरण देकर इस रिश्ते को सामाजिक परंपरा के विरुद्ध बताते हुए महापंचायत करने का निर्णय लिया गया था। लेकीन महापंचायत को जब आयोजित किया गया तब क्षेत्र विशेष का रूप देकर इसकी शक्तियों को खत्म कर दिया गया। समाज सुधार के नाम पर जाम्भा में सभा बुलाई गई प्रथम सभा को यहां क्षेत्र विशेष की बताने के कारण समाज सुधार हेतु बुलाई धर्म सभा की तौहीन होते देख ऐक बंद कमरे में बैठकर कुछ पंच और संतों ने मंथन किया जो देर रात होते होते ऐक लेटर जारी हुआ जिसमे लिखा गया सरंक्षक परिवार के बार बार अंतर्जातीय रिश्तो से समाज की भावनाएं आहत हुई है इसलिए आपको समाज के गरिमा महि पदो व सम्मान से मुक्त किया जाता हैं । 20 मार्च को ऐसा आदेश सोशल मीडिया पर जारी होता है जिसका जवाब कुलदीप जी बिशनोई सरंक्षक को 14 दिनो के भीतर देना बताया गया था।
ऐसा आदेश जारी होते ही जो लोग जांम्भा पंच पंचायती को बिशनोई समाज का सुप्रीम कोर्ट मानते थे वो इसके विरूद्ध हो जाते है और अनेकों संस्थाओं के जारी पत्रों में जांम्भा पंच पंचायती का विरोध किया गया उसी को आधार बनाकर।
महासभा ने किया सरक्षक का बचाव
26 मार्च 23 को महासभा की बैठक से जांम्भा पीठ को चुनौती के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए सोशल लेटर के विरोध में अखिल भारतीय विश्रोई महासभा कार्यालय में बैठक की गई. जहा जांम्भा पीठ को तथाकथीथ शब्द से संबोधित करते हुए ऐक लाईव वीडियो अखिल भारतीय बिशनोई महासभा के अध्यक्ष देवेन्द्र जी बुड़िया के फेसबुक पेज पर लाईव किया गया। जांम्भा द्वारा जारी पत्र को चुनौती देकर तथाकथित पंचायती का खंडन करते हुए तथा सामाजिक अपवाद पैदा करते हुए कुछ साधु संतों व पंचों ने जिनके हस्ताक्षर जांम्भा पीठ द्वारा जारी पत्र पर हैं, उन्हें अच्छे बुरे शब्दो से विरोध करते हुए महासभा से ऐक विरोध जारी करते हैं और संरक्षक को अध्यक्ष महोदय जी सोशल सर्विस का हवाला देकर क्लीन चिट देने के फोटो और वीडियो जारी करते हैं.
जिसका विरोध शोशल मीडिया पर होना शुरु हो जाता है
सरंक्षक के मुद्दे से भटके लोग लिपट गए अध्यक्ष को
26 मार्च को महासभा द्वारा जारी लेटर और वीडियो का समाज में घोर विरोध शुरु हुआ जिसमे जाम्भा पंच पंचायती द्वारा सरंक्षक के नाम जारी पत्र का ज़वाब अध्यक्ष जी द्वारा दिया गया था अब समाज में विरोध अध्यक्ष जी का होने लगा और साथ ही अध्यक्ष जी के द्वारा सामाजिक मंचो पर दिए बयानों का विरोध जोर पकड़ता गया जिसके चलते भादूओ पर की टिका टिपनी की लिखित माफ़ी सोशल मीडिया पर अध्यक्ष जी द्वारा मांगी गई थी। लेकीन अध्यक्ष जी को अपने किए का दर्द था जिसको उन्होने समाज के सामने अपने आप को समर्पित करणा उचित समझा
समर्पण यात्रा समाज व संतों से माफ़ी मांगने के हेतु।
दिनाक 31 मार्च 2023 महासभा अध्यक्ष का जांम्भा पदयात्रा की शुरआत होती है अंतर्जातीय विवाह व समाज में फैल रहे अपवादों के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश को रोकने के लिए महासभा अध्यक्ष देवेंद्र बुड़िया जोधपुर से जांम्भा तक पदयात्रा निकालकर नाराज संतों को मनाने हेतु 4 दिन पैदल चलकर जांम्भा आते हैं लोगो ने सोसल मिडिया पर उनकी यात्रा का विरोध करने का लिखा था लेकीन ऐसा कुछ नही होता है और वो सफलता पूर्ण यात्रा सम्पन करते हैं। लेकिन महासभा और संतों के बीच चल रहे इस चश्मदीद गवाह से आहत होकर समाज की विचारधारा में अलगाव के बीज तब फूटने लगे, जब सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा तेज हो गया. जिसका असर 02 अप्रैल 23 को रामड़ावास विलोजी मेले में देखने को मिला।
रामड़ावास धर्म सभा के बाद महासभा पक्ष को मिली मजबूती
रामड़ावास मेले में आयोजित धर्म सभा में शुरूआती भाषणों में संत लालदास जी द्वारा अध्यक्ष जी पर की गई भद्र टिका टिपणी जिसका हुआ जनता की तरफ से विरोध –देखे विडियो में –
संत लालदास जी के भाषण का विरोध होने की वज़ह से डॉक्टर गोरधनदास जी ( सभा को सम्बोधित करने हेलिकॉप्टर से आय थे ) ने बीच बचाव में समाज को शान्त किया और मंच की कार्यवाही वापिस सुचारू हुई थी लेकीन समाज के वक्ताओ की बोली बदल गईं और जोशहीन भाषणों का सम्बोधन का दौर चल पड़ा लोगो में अब विरोध की उम्मीद टूटने लगी और श्रोता उठने लगे पर ऐक उम्मीद थी संत डॉक्टर गोरधनदास जी के भाषण की वो भी उनके खुले शब्दो में उदबोधन नही होने की वजह से समाज की समझ से परे रहा देखे पुरा विडीयो
भाषणों का दौर जारी था और ठेकेदार पपुराम जी डारा के भाषण से महासभा पक्ष को मिली मजबूती क्योंकि उन्होने डॉक्टर गोरधनराम जी को लगभग 5 लाख रुपए खर्च करके इस सभा को सम्बोधित करने हेतू हेलीकॉप्टर से लाया गया था और इस बात को उन्होने मंच पर रख दिया देखे विडीयो में महासभा अध्यक्ष जी पद यात्रा पर थे उन्होने नोसर में रात्रि विश्राम की जागरण में पपूराम जी डारा को अपना विरोधी बताते हुए हेलीकॉप्टर वाली बात का हवाला देकर समाज की भावनाओ को जीत लिया यहां से शुरु होता है समाज के साथ असली खेल
जो अध्यक्ष जी जोधपुर से पैदल यात्रा में चंद लोगो के साथ रवाना हुवे थे उनको अब समाज का समर्थन मिला शुरु हुआ जो जाम्भा तक जाते जाते उनके इस संकल्प को समाज के ऐक बड़े वर्ग ने उनकी सराहना करना शुरु कर दिया और लोगो की भावनाओ से जुड़ गए।
प्रधान देवेंद्र जी ने पलट दिया पुरा पासा
07 अप्रैल 23 को कुलदीप जी विशनोई व अध्यक्ष देवेंद्र जी बुड़िया मुकाम आते हैं। जहां पीटाधीशवर रामानंद जी से आशीर्वाद के बहाने दोनों अपने पदो से त्याग पत्र सोपते है जिसको स्वामी रामानंद जी स्वीकार करने से मना कर देते हैं अकेले संत को भार में डाल कर निर्णय के लिए बाध्य किया गया स्वामी जी के नही मानने पर जांम्भा मेहनतो से बात होना बताते हैं लेकीन रामानंद जी द्वारा फिर भी नही मानने पर जाम्भा मेहन भगवान दास जी द्वारा किन्ही कारणों से नही उपस्थित नही हो पाने के जारी विडीयो के बाद रामानन्द जी सहमत होते हैं उन्हें आशीर्वाद देने को कहते हैं। ऐसा माहौल बनते ही अध्यक्ष और सरक्षक दोनों ही उनको महासभा कार्यालय ले जाते है और कुलदीप जी को पगड़ी रामानंद जी के हाथो से पहनाकर आशीर्वाद दिलवाते है जिसके आधार पर अध्यक्ष जी द्वारा जारी विडीयो के माध्यम से ऐसा लिखा गया की अब हमे समाज के कार्यों को यथा स्तथी पदो पर रहते हुए करने का समाज अधिकृत कर देता है मुकाम के तुरंत बाद दोनों पिथरासर में चल रही राजेंद्रनाद जी कथा में उपस्थित होकर चंद समय का भाषण देकर समाज में ये साबित कर देते है की अब समाज में कोई भी विरोध का माहौल नही है
फिर भी विरोध धमा नही
17 अप्रेल को खेजड़ली में आयोजित विश्रोई संस्कृति बचाओ अभियान की सामाजिक बैठक में साफ कर दिखा की अब सभाओं से समाज को गुमराह नही करे क्योंकि यहां पर पंच पंचायती अलग भागो में टूट गई थी जहां वहाँ अन्तर्जातीय विवाहों के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव ही लिखे जाते थे और मुक़ाम को निर्णय के लिए अधिकृत मानकर आम लोगों को अगली तारीख बता दी जाती थी।
20 को मुकाम, 22 को जांबा- दो महीने से चली आ रही इस आंधी में पहले 20 अप्रैल को मुकाम में फैसला सुनाने की बात हुई, फिर 22 अप्रैल को जाबा में फैसला आने की बात कही गई. ऐसे में महासभा और जांम्भा पीठ के बीच पिस रहे समाज के आम लोग आज भी इस उम्मीद का इंतजार कर रहे हैं. किसी दिन फिर से सामाजिक न्याय की चादर बिछेगी और ठोस निर्णय से सामाजिक एकता बहाल होगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नही होता है और अब ये विरोध धमने की और बढ़ रहा है सबसे बड़ी कमजोरी विरोध की अगुआई कर रहे लोगो की रही है जिसमे साफ दिखता है सामाजिक मुद्दों को तुल पकड़ाते है और वो ऐक दम घुटने टेक देता है जिसके
मुख्य कारण विरोध की अगुआई कर्ताओं के निजी स्वार्थ सिद्ध हो जाने के बाद चुप हो जाना समाज हित के लिए बहुत बडा निंदनीय विषय है।
अब गरीब परिवारों पर गिर रही है गाज
अब गरीब परिवारों के बच्चों द्वारा ऐसे अंंतरजातीय शादियां किए जाने पर स्थानीय लोगो व पंचों द्वारा इस घटना को जूठ मुठ का न्याय का आधार मानकर कई लोगो को समाज से निकालने व दण्डित किए जाने जैसी खबर सुनने को मिल रही है जो बहुत निन्दनीय है समाज और संतों को आमने आकर अंतरजातीय विवाह जैसी चीजों पर पारदर्शिता बता देनी चाहिए ताकी समाज के हित में जरुरी है
ताकी समाज की तौहीन सोशल मिडिया पर नही हो और समाज की गरिमा को मिट्टी में मिलने से बचाया जा सके ।
आपकी क्या राय है
समाज के ऐसे मुद्दों को सोशल मीडिया पर उठाने से समाज का भला होगा या चंद लोगो का निजी स्वार्थ सिद्ध होता है कोमेंट के माध्यम से अपने विचार रखे ।







