चंद्रयान-3 के 10वें दिन, ISRO ने शनिवार को आदित्य L1 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन के तहत आदित्य सूर्य की अध्ययन करेगा। यह मिशन सुबह 11.50 बजे PSLV-C57 के XL वर्जन रॉकेट के माध्यम से श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया।
रॉकेट ने 63 मिनट 19 सेकेंड के बाद आदित्य को 235 x 19500 किलोमीटर की पृथ्वी की कक्षा में स्थिति दिया। लगभग 4 महीने बाद, यह सूर्य से 15 लाख किलोमीटर दूर लैगरेंज पॉइंट-1 पर पहुंचेगा। इस पॉइंट पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है, जिससे यहां से सूर्य की अनुसंधान करना सुनिश्चित होगा।
यहां 5 पॉइंट्स में आदित्य L1 मिशन के सफर को जानें:
- PSLV रॉकेट ने आदित्य को 235 x 19500 किलोमीटर की पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाया।
- इसके बाद, यह पृथ्वी की कक्षा में 16 दिन तक रहेगा और 5 बार थ्रस्टर फायर करके अपनी ऑर्बिट को बढ़ाएगा।
- फिर, आदित्य के थ्रस्टर फिर से काम करेंगे और यह L1 पॉइंट की ओर बढ़ेगा।
- 110 दिनों के सफर के बाद, आदित्य ऑब्जर्वेटरी इस पॉइंट के पास पहुंचेगा।
- थ्रस्टर्स की मदद से, आदित्य को L1 पॉइंट की ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।
लैगरेंज पॉइंट-1 (L1) क्या है?
लैगरेंज पॉइंट का नाम इतालवी-फ्रेंच मैथमैटीशियन जोसेफी-लुई लैगरेंज के नाम पर रखा गया है, और इसे L1 के रूप में जाना जाता है। ये पांच बिंदु हैं जो धरती और सूर्य के बीच हैं, जहां सूर्य और पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण और सेंट्रिफ्यूगल फोर्स का संतुलन होता है।
इस कारण, किसी वस्तु को इन पॉइंट्स पर रखने पर वह वहां स्थिर रहती है और चक्कर लगाने की शुरुआत करती है, जिससे वह दोनों के बीच रहती है। पहला लैगरेंज पॉइंट धरती और सूर्य के बीच लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर होता है।
L1 पॉइंट पर ग्रहण किया जाने पर कोई प्रभाव नहीं होता है, इसलिए आदित्य यान क
ो यहीं भेजा गया है। इससे आदित्य सूर्य की गतिविधियों को निरंतर अवलोकन कर सकेगा, जैसे कि वास्तविक समय पर सौर संवेग और अंतरिक्ष के मौसम।
आदित्य L1 पर 7 पेलोड्स कोरोना हीटिंग, कोरोना मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर एक्टिविटीज की विशेषताओं, पार्टिकल्स के मूवमेंट, और स्पेस वेदर को समझने के लिए उपयोग किया जाएगा। आदित्य L-1 सोलर कोरोना और उसके हीटिंग मैकेनिज्म का अध्ययन करेगा।
ISRO के एक अधिकारी के अनुसार, आदित्य L1 मिशन पूरी तरह से देशी प्रयास से बनाया गया है। इस मिशन के लिए बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) ने विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ पेलोड तैयार किया है, जबकि पुणे के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स ने सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजर पेलोड विकसित किया है।
आदित्य स्पेसक्राफ्ट को L1 पॉइंट तक पहुंचने में 126 दिन लगेंगे, और इसका पूरा सफर 6 जनवरी 2024 को समाप्त होगा। इस मिशन की सफलता की बात हो और आदित्य स्पेसक्राफ्ट L1 पॉइंट 1 पर पहुंच जाए, तो इससे नए साल में ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।








