Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्ली: कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई विद्या संबल योजना पर अब संकट मंडरा रहा है। एक सप्ताह बाद कॉलेजों में लगे एक हजार अस्थायी शिक्षकों को हटा दिया जाएगा।
कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई विद्या संबल योजना पर अब संकट मंडरा रहा है। एक सप्ताह बाद कॉलेजों में लगे एक हजार अस्थायी शिक्षकों को हटा दिया जाएगा। वहीं,अभी तक इस योजना के तहत नए अस्थायी शिक्षकों को लगाने के लिए कॉलेज आयुक्तालय की ओर से नोटिफिकेशन नहीं निकाला गया है। ऐसे में कॉलेजों से अस्थायी शिक्षकों के हटने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा।
दरअसल, कॉलेजों में इसी सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है। ऐसे में सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाई कराने के लिए कॉलेजों में शिक्षकों की जरूरत है। कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों के सात हजार पद रिक्त चल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कॉलेज शिक्षा अध्यापक एसोसिएशन राजमेस की ओर से प्रदेशाध्यक्ष व महामंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री से इन शिक्षकों को दूबारा नियुक्ति देने की मांग की गई है।
भाजपा सरकार के लिए चुनौती
पूर्व कांग्रेस सरकार ने राजस्थान में कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी,लेकिन कॉलेजों में संसाधन और शिक्षकों की कमी है। इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में उच्च शिक्षा का ढांचा बिगड़ा हुआ है। आलम यह है कि दो या तीन शिक्षकों के भरोसे कॉलेज चल रहे हैं। नई सरकार के सामने कॉलेजों के बिगड़े ढांचे को सुधारने सहित रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को भरने की बड़ी चुनौती होगी।
कॉलेजों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन अब इनके आधारभूत ढांचे को विकसित करने की जरूरत है। कॉलेजों को भवन मिलने चाहिए। इसके अलावा स्थायी शिक्षक नियुक्त नहीं होने तक विद्या संबल योजना के तहत अस्थायी शिक्षक लगाए जाने चाहिए।
डॉ.नरेंद्र सिंह बैरवा, सहायक आचार्य।
नोडल कॉलेजों में शिक्षक नहीं है। वहीं, विद्या संबल योजना के तहत अस्थायी शिक्षक नहीं लगा रखे हैं। इसके कारण सेमेस्टर के तहत पढ़ाई नहीं हो रही है। छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। अस्थायी शिक्षकों को सैलरी भी नहीं मिल रही है।
डॉ.केशरीमल निनामा, अध्यक्ष,सहायक आचार्य, विद्या संबल योजना
भर्ती पूरी होने में लगेंगे दो साल
आरपीएससी की ओर से करीब 1900 पदों पर सहायक आचार्य की भर्ती की जा रही है। इसकी परीक्षाएं नए साल से शुरू होंगी। ऐसे में भर्ती पूरी होने में करीब दो साल का समय लगेगा। अस्थायी शिक्षक नहीं होने से कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था लडखड़ा जाएगी। सबसे अधिक समस्या राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी (राजसेस) के कॉलेजों में होगी।
फैक्ट फाइल
550 सरकारी कॉलेज हैं राजस्थान में
190 कॉलेज हैं राजसेेस के
1000 से अधिक अस्थायी शिक्षक लगे हैं राजसेस के कॉलेजों में
28 फरवरी, 2024 को कार्यकाल पूरा होगा
2000 अस्थायी शिक्षक लगे थे पिछले साल तक








