Jambhsar Media Digital Desk : जीरा सोंफ की तरह दिखने वाली एक मसाला फसल है, यह दिखने में थोड़ा मटमैला होता है | कई तरह के व्यंजनों में जीरे का इस्तेमाल खुशबु उत्पन्न करने के लिए करते है, जिस वजह से यह सभी की रसोई में जरूर मौजूद होता है |
जीरे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है| इसकी मांग देश-विदेश में काफी अधिक रहती है, जिस वजह से किसानो को जीरे के काफी अच्छे दाम भी मिल जाते है| यह खास मौसम और माहौल में तैयार की जाती है, लेकिन अगर मौसम अच्छा न हो तो फसल में काफी नुकसान भी उठाना पड़ता है, और जीरे की उपज व् उत्पादन दोनों ही प्रभावित होती है |
गुजरात और राजस्थान ऐसा राज्य है, जहां का मौसम जीरे की फसल के लिए अनुकूल होता है| पूरे भारत देश में जीरे का उत्पादन सबसे ज्यादा गुजरात राज्य में होता है| अगर आप देश की प्रमुख मंडियों में आज जीरे का भाव क्या चल रहा है, पता करना चाहते है, तो यहाँ पर आपको जीरा का भाव आज का 2024 (Jeera Ka Bhav Today UP Mandi) तथा मंडी में जीरा का भाव क्या चल रहा है इसके बारे में बता रहे है |
किसानो के लिए जीरा एक ऐसी फसल है, जो जलवायु परिवर्तन की वजह से काफी जल्दी प्रभावित हो जाती है | देश-विदेश में जीरे की फसल के लिए उपयुक्त मौसम न मिल पाने की वजह से फसल अधिक प्रभावित होती है, और भाव में भी तेज देखने को मिलता है| आज के दिन जीरे का भाव 25,500 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से चल रहा है | इसके अलावा देश की प्रमुख मंडियों में आज के दिन जीरे का भाव क्या चल रहा है, उसकी सूची आपको नीचे दी गई है:-
देश के राजस्थान और गुजरात राज्य को जीरा उत्पादक का मुख्य स्थान माना गया है, वर्तमान समय में जीरे के भाव में तेजी देखने को मिल सकती है | क्योकि देश में इस बार जीरे की बुवाई का क्षेत्रफल घटा है, जिस वजह से पैदावार भी काफी कम हुई है | यही वजह है, कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जीरे के भाव में 5 से 10 हज़ार रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बढ़ोतरी हुई है |
अच्छी क़िस्म का जीरा आपको वही मिलेगा, जहां पर जीरे का उत्पादन होता है | देश की प्रमुख मंडियों जैसे :- राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र के अलावा अन्य राज्य में भी जीरा व्यापार किया जाता है, जहां से आप अच्छी क्वालिटी वाला जीरा ले सकते है |
मंडोर की मुख्य मंडी में ग्रामीण क्षेत्रों से जीरे की आवक काफी बढ़ी हुई है | जीरे से भरे वाहन पूरा ही दिन मंडी में लगे हुए चल रहे है, जिस वजह से मंडी प्रागंण तक छोटा पड़ गया है | जोधपुर मंडी के मुख्य व्यापारी व् संघ अध्यक्ष पुरुषोत्तम मूंदड़ा के अनुसार पिछले वर्ष सिर्फ अप्रैल माह में ही जीरे की तक़रीबन 88 हजार बोरियो की आवक हुई थी, जिसे भंडारित करने के लिए मंडी के समीप 11 बीघा खाली पड़ी भूमि का सहारा लिया गया | राज्य सरकार के पास अभी यह मामला विचाराधीन है, लेकिन इस बार अगर भारी आवक रहती है, तो उसके लिए पहले से इंतजाम कर लिए जाएंगे |








