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MGNREGA 2024 : 85 लाख से अधिक मजदूरों को मनरेगा योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जानिए वजह

MGNREGA 2024 : 85 लाख से अधिक मजदूरों को मनरेगा योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जानिए वजह
MGNREGA 2024 : 85 लाख से अधिक मजदूरों को मनरेगा योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जानिए वजह

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा चलाई जा रही है। इसके माध्यम से नागरिकों 100 दिन का गारंटी रोजगार दिया जाता है। रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के अंतर्गत अगर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रहने वाला कोई भी व्यक्ति सरकार से रोजगार की मांग करता है, तो उसे 100 दिन का गारंटी रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। हाल ही में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारण द्वारा लोकसभा में वित्तवर्ष 2024-25 के लिए केंद्र सरकार का अंतरिम बजट पेश किया गया।

इस बजट में नेरगा का बजट बढ़ाया गया। वित्तमंत्री ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए मनरेगा रोजगार गारंटी योजना का बजट पिछली बार के मुकाबले 26 हजार करोड़ रुपए बढ़ाया है। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाये गए इस बजट का लाभ देश के 85 लाख से अधिक मनरेगा मजदूरों को नहीं मिल पाएंगा। क्योंकि, भारत सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme) तहत इन मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड को सिस्टम से हटा दिया है। आईए, इस पोस्ट की मदद से इसके पीछे की वजह को जानते हैं।

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2024 को लोकसभा में वित्तवर्ष 2024-25 के लिए मोदी  सरकार का अंतरिम बजट पेश किया। इस अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने किसानों के लिए कई बड़ी घोषणा की, जिनमें नरेगा का बजट बढ़ाने का ऐलान मुख्य है। वित्त मंत्री ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी नरेगा का बजट 26 हजार करोड़ रुपए बढ़ाकर इस वर्ष के लिए 86 हजार करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछली बार नरेगा के लिए कुल 60 हजार करोड़ रुपए का बजट था।

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकर ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में मनरेगा के लिए 5060 करोड़ रुपए की धनराशि व्यवस्था की है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए मनरेगा का बजट बढ़ाने से केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिए गए थे कि सरकार ग्राम पंचायतों में नरेगा मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराती रहेगी और रोजगार के अवसर बनते रहेंगे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रदर्शित आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1 फरवरी 2024 तक कुल 85 लाख 64 हजार मनरेगा मजदूरों के जॉब कार्ड सिस्टम से हटा दिए गए हैं। इसके पीछे सरकार ने कई वजहें बताई है जैसे फर्जी या डुप्लीकेट जॉब कार्ड, काम करने के इच्छुक नहीं, परिवार स्थायी रूप से ग्राम पंचायत से स्थानांतरित या पलायान कर चुका है, जॉब कार्ड में एक व्यक्ति और उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई है।

इसके अलावा, नरेगासॉफ्ट के मुताबिक अप्रैल, 2022 से 1 फरवरी 2024 तक महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (नरेगा योजना) के अंतर्गत कुल 311.19 लाख मनरेगा जॉब कार्ड हटाए गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मनरेगा में महाराष्ट्र, वेस्ट बंगाल और उत्तर प्रदेश राज्य से सर्वाधिक मजदूर रजिस्टर्ड हैं, जिसमें सर्वाधिक 2.86 करोड़ मजदूर महाराष्ट्र से मनरेगा (MGNREGA) के लिए रजिस्टर्ड हैं, जबकि, वेस्ट बंगाल से 2.57 करोड़ मजदूर और उत्तर प्रदेश से 2.01 करोड़ मजदूर मनरेगा योजना के तहत रजस्टर्ड हैं।

मंत्रालय के अनुसार मनरेगा रोजगार गारंटी योजना (nrega employment guarantee scheme) के अंतर्गत कुल 25.81 करोड़ मजदूर मनरेगा के लिए रजिस्टर हैं, जिसमें से 14.33 करोड़ सक्रिय मजदूर है। सक्रिय मजदूरों ने बीते तीन साल में कम से कम एक दिन काम किया है। वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरक ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा सिस्टम से हटाए गए कुल 85.64 लाख जॉब कार्ड बैंक खातों के साथ आधार के लिंक न होने के कारण नहीं हटाए गए हैं। बताया गया है कि कार्ड को अपडेट करना या हटाना राज्यों की सरकारों की द्वारा जाने वाली एक नियमित प्रक्रिया है। मनरेगा लाभार्थियों को मजदूरी का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते, डाकघर खाते में प्रदान किया जा रहा है

। कहा गया है कि मजदूरी का भुगतान आधार आधारित पेमेंट ब्रिज (APB) प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जो 1 जनवरी 2024 से अनिवार्य कर दी गई है। बता दें कि आधार भुगतान ब्रिज वह प्रणाली है, जिसमें किसी व्यक्ति (स्त्री/पुरुष) के बैंक खाते में उसके आधार नंबर से भुगतान किया जाता है। आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) का प्रयोग नकदी की निकासी तथा जमा सहित बुनियादी बैंकिंग लेनदेन के लिए किया जा सकता है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (MGNREGA) योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2005 में शुरू किया गया। यह विश्व के सबसे बड़े रोज़गार गारंटी कार्यक्रमों में से एक है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से भारत के ग्रामीण क्षेत्रो में रहने वाले गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को अर्ध या अकुशल कार्य प्रदान करना है। यह देश में अमीर और गरीब के बीच के अंतर को कम करने का प्रयास करता है। मनरेगा योजना न्यूनतम वेतन पर सार्वजनिक कार्यों से संबंधित अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 100 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी देता है।

नरेगा (NREGA) की आधारशिला इसकी रोजगार की कानूनी गारंटी है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी ग्रामीण वयस्क सरकार से कार्य (कार्य) के लिए अनुरोध कर सकता है, तो उसे 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदान किया जाता है। मनरेगा की धारा 17 में mgnrega के तहत निष्पादित सभी कार्यों का सामाजिक लेखा-परीक्षण अनिवार्य है।

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