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नागौर के पशु मेले में पहुंचा 3 लाख का बैल, मिनटों में कर देता है ये काम

नागौर के पशु मेले में पहुंचा 3 लाख का बैल, मिनटों में कर देता है ये काम
नागौर के पशु मेले में पहुंचा 3 लाख का बैल, मिनटों में कर देता है ये काम

Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्‍ली: नागौर में लगने वाला मेला भारत का दूसरा सबसे बड़ा मेला है। प्रति वर्ष जनवरी और फरवरी के महीनों के बीच आयोजित होने वाले, इस मेले को नागौर के पशु मेले के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह वह जगह है जहां मालिक जानवरों का व्यापार करने के लिए इकट्ठा होते हैं। राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेला नागौरी नस्ल के बैलों की चमक से निखरने लगा है। मेला परिसर में हर तरफ नागौरी नस्ल का गोवंश ही नजर आ रहा है। इनमें दो वर्ष से कम के बछड़े हैं तो 50 हजार से लेकर तीन लाख तक की कीमत के नागौरी बैल भी हैं।

राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेला नागौरी नस्ल के बैलों की चमक से निखरने लगा है। मेला परिसर में हर तरफ नागौरी नस्ल का गोवंश ही नजर आ रहा है। इनमें दो वर्ष से कम के बछड़े हैं तो 50 हजार से लेकर तीन लाख तक की कीमत के नागौरी बैल भी हैं। इन बैलों के गले में बंधी घंटियों की गूंज से मेला मैदान की रंगत बदल गई है। लाखों रुपए के बैलों के साथ आए पशुपालकों को अब खरीदारों का इंतजार है। मेले में हरियाणा व मध्यप्रदेश के साथ ही स्थानीय पशुपालक अपने बैल लेकर पहुंचने लगे हैं। इनमें विशेष बात यह है कि विभिन्न प्रदेशों से बैलों की बिक्री करने पहुंचे पशुपालकों के पास भी नागौरी नस्ल के ही बैल हैं। भड़ाना गांव से आए अर्जुनराम काला की बैलों की जोड़ी एक लाख 40 हजार रुपए की है।

काला ने बताया कि वे बैलों को पारिवारिक सदस्य की तरह रखते हैं। इनका खासतौर पर रखरखाव किया जाता है। वे बैलों को वह सोनू-मोनू के नाम से पुकारते हैं। इनकी विशेषता है कि यह दोनों बैल सामान्यतौर पर बुलाने से नहीं आते हैं, इनका नाम पुकारने पर यह तुरन्त दौड़कर आते हैं। हालांकि वह इनको बेचना नहीं चाहते हैं, लेकिन ज्यादा समय तक नहीं रख पाने की मजबूरी है। उन्होंने बताया कि परिश्रम में इनका कोई तोड़ नहीं है। इन बैलों को बचपन से पाला है। इसी गांव से बैलों की जोड़ी लेकर पहुंचे रामरतन काला के पास भी चौनू, मोनू के नाम से नागौरी नस्ल के बैल हैं।

रामरतन ने उनके बैलों की जोड़ी की कीमत ढाई लाख रुपए बताई। दोनों को बचपन से पाला है। इनके रखरखाव में प्रतिमाह बीस हजार से ज्यादा का व्यय होता है। रामरतन ने दोनों को चौनू व मोनू के नाम से पुकारा तो दोनों बैल उनके पास आकर खड़े हो गए। यह दोनों आंख के इशारे से ही पूरी बात समझ जाते हैं। मध्य प्रदेश के खण्डवा से आए पशुपालक विष्णु के पास भी नागौरी नस्ल का बैल है। कीमत केवल 65 हजार जोड़ी है, लेकिन मेहनत करने में उनके बैलों का कोई जोड़ नहीं है। उनको मेले में बैलों की अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है।

रामदेव पशु मेला में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाई गई आईईसी प्रदर्शनी में सरकार की कई चिकित्सा योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इनमें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र, टीबी मुक्त भारत अभियान, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, अंगदान जीवनदान महाअभियान, राजश्री योजना, पीसीपीएनडीटी एक्ट, नयन दृष्टि अभियान, तम्बाकू मुक्त राजस्थान अभियान तथा मुख्यमंत्री चिरंजीवी जीवन रक्षा योजना तथा एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान आदि शामिल है। सीएमएचओ डॉ. महेश वर्मा ने बताया कि चिकित्सा शिविर में पशुपालक अपनी प्रारंभिक चिकित्सा का लाभ ले सकते हैं।

जिला आईईसी समन्वयक हेमन्त उज्जवल ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में जिला अंधता निवारण समिति, साइट सेवर्स संस्था तथा उरमूल खेजड़ी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रामदेव पशु मेले में पशुपालकों के लिए निशुल्क नेत्र जांच शिविर लगाया जाएगा। शिविर में पशुपालकों की नेत्र जांच कर उनमें मोतियाबिंद के रोगियों को ऑपरेशन के लिए स्थानीय एवं सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए रैफर किया जाएगा।

रामदेव पशु मेला में मंगलवार तक 4175 पशु पहुंच चुके थे। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मूलाराम जांगू ने बताया कि अब तक 2259 गोवंश, भैंस वंश 37, 1733 ऊंट एवं 146 अश्व वंश आ चुका है। पशुओं की आवक जारी है। सर्वाधिक पशुओं की संख्या गोवंश की है। दूसरे नंबर पर ऊंट हैं। अब आए गोवंश में ज्यादातर नागौरी नस्ल का गोवंश हैं, और ऊंटों में बीकानेरी नस्ल के ऊंटों की संख्या ज्यादा है।

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