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राजस्थान के इन 30 हजार कर्मचारियों का होगा प्रोमोशन, चुनाव से पहले लग सकती है मुहर

राजस्थान के इन 30 हजार कर्मचारियों का होगा प्रोमोशन, चुनाव से पहले लग सकती है मुहर
राजस्थान के इन 30 हजार कर्मचारियों का होगा प्रोमोशन, चुनाव से पहले लग सकती है मुहर

Jambhsar Media News Digital Desk नई दिल्‍ली: तृतीय श्रेणी शिक्षक विभागीय पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं लेकिन 4 साल बाद भी उनकी ये आस पूरी नहीं हो पाई है। अतिरिक्त विषय में स्नातक डिग्रीधारियों की डीपीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले के कारण करीब 30 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी हुई है।

तृतीय श्रेणी शिक्षक विभागीय पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं लेकिन 4 साल बाद भी उनकी ये आस पूरी नहीं हो पाई है। अतिरिक्त विषय में स्नातक डिग्रीधारियों की डीपीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले के कारण करीब 30 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी हुई है। पदोन्नति नहीं होने पर तृतीय श्रेणी शिक्षक वरिष्ठ अध्यापक पद पर पदोन्नत नहीं हो पा रहे हैं। सरकार इस मसले का हल नहीं निकाल पा रही है।

शिक्षकों के अनुसार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले नहीं होने से कई स्कूलों में पद खाली पड़े हैं। दूसरी ओर वर्षों से बाहरी जिलों में बैठे शिक्षक तबादले के इंतजार में ही हैं। प्रदेश की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों की मांग पर 18 अगस्त 2021 से शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, जिसमें प्रदेश के 33 जिलों से कुल 80 हजार 781 शिक्षकों ने आवेदन कर तबादला करने की मांग की थी। इसमें उदयपुर से 3778 शिक्षकों ने आवेदन किए थे लेकिन गहलोत सरकार ने आवेदन लेने के करीब दो साल तक सत्ता में रहने के बावजूद तबादले नहीं किए। अब शिक्षकों को नई सरकार से उम्मीद है।

सरकार द्वारा बीच का रास्ता निकालकर समाधान करके डीपीसी करनी चाहिए । पहले से डिग्री कर चुके शिक्षकों को पात्र मानकर डीपीसी में शामिल कर लेना चाहिए। भविष्य में इस प्रकार की डिग्री करने वालों को डीपीसी में शामिल नहीं करने का नियम बनाना चाहिए। ताकि न तो कोई डिग्री करेगा और न ही पात्र माना जाएगा।
बसन्त कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा

शिक्षा विभाग में पहले डीपीसी में अतिरिक्त विषय में स्नातक उत्तीर्ण को पदोन्नति के लिए पात्र माना जाता रहा है, लेकिन पिछली सरकार ने बिना शिक्षा सेवा नियमों में संशोधन किए एक कमेटी के फैसले का हवाला देते हुए डीपीसी में अतिरिक्त विषय स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को अपात्र करार दे दिया। इस कारण पदोन्नति से वंचित हुए करीब 700 शिक्षक हाईकोर्ट चले गए। न्यायालय की एकल पीठ ने डीपीसी पर स्टे दे दिया। इसके बाद सरकार खंडपीठ में गई और खंडपीठ में भी अतिरिक्त विषय स्नातक शिक्षकों की पदोन्नति कर बंद लिफाफे में डीपीसी करने पर सहमति दे दी। इस पर शिक्षक उच्चतम न्यायालय की शरण में चले गए और बंद लिफाफे में डीपीसी करने पर स्थगन ले आए।

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