राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। खंडार क्षेत्र के बरनावदा गांव में उस समय मातम छा गया जब एक ही परिवार के तीन सदस्यों—पति, पत्नी और मासूम बेटे—का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।
तेज रफ्तार पिकअप बनी काल, तीन जिंदगियां खत्म
जानकारी के अनुसार, हंसराज बैरवा अपनी पत्नी श्यामा और नौ साल के बेटे सुनील के साथ मजदूरी के लिए निकले थे। इसी दौरान जयपुर रिंग रोड स्थित सीतारामपुरा सर्विस रोड पर तेज गति से आ रही एक पिकअप वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भयानक थी कि मासूम सुनील ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल हंसराज और उनकी पत्नी ने अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वाहन की रफ्तार बहुत ज्यादा थी, जिससे यह हादसा बेहद घातक साबित हुआ।
एक ही चिता पर तीन अर्थियां, गांव की आंखें हुईं नम
जब तीनों के शव रात में गांव पहुंचे, तो हर कोई स्तब्ध रह गया। परिजन और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम संस्कार के समय ऐसा दृश्य था, जिसे देखकर हर आंख नम हो गई।
एक ही चिता पर तीनों का अंतिम संस्कार किया गया—यह दृश्य गांव के लोगों के लिए असहनीय था। बुजुर्ग माता-पिता और बड़ा बेटा इस दुख को सहन नहीं कर पा रहे थे और बेसुध हो गए।
11 साल की बेटी बची, लेकिन जिंदगी बदल गई
इस त्रासदी में परिवार की 11 वर्षीय बेटी निशा ही जीवित बची है, जो उस समय अपने ननिहाल गई हुई थी। एक पल में उसने अपने माता-पिता और भाई को खो दिया।
अब उसका भविष्य अनिश्चित हो गया है। परिवार में कमाने वाला कोई नहीं बचा, जिससे परिजन और ग्रामीण उसकी परवरिश और शिक्षा को लेकर चिंता में हैं।
उजड़ गया पूरा घर, गांव में गूंज रही सिर्फ सिसकियां
बरनावदा गांव में इस हादसे के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है। हर घर में इसी घटना की चर्चा है और हर व्यक्ति गमगीन है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तेज रफ्तार पिकअप ने पूरे परिवार को खत्म कर दिया और एक मासूम बच्ची को जिंदगी भर का दर्द दे दिया।
सवालों के घेरे में तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सड़क पर सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों के खत्म होने की कहानी है, जिसने पूरे गांव को गहरे दुख में डुबो दिया।








