अजमेर/अंबाला। हरियाणा के अंबाला में विस्फोटक पदार्थ आरडीएक्स के साथ पकड़े गए संदिग्धों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार राजस्थान से जुड़ते नजर आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में पकड़ा गया मुख्य आरोपी अली अकबर उर्फ बाबू मूल रूप से राजस्थान के अजमेर का रहने वाला है और पहले ऑटो चालक के रूप में काम करता था।
पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे गए विस्फोटकों तक उसकी पहुंच और संभावित आतंकी साजिश के बीच कई अहम कड़ियां तलाश की जा रही हैं।
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे गए विस्फोटक
जांच एजेंसियों के अनुसार सीमावर्ती इलाके में पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए विस्फोटक सामग्री भारत में भेजी गई थी। इसी कड़ी में अंबाला से कुछ संदिग्धों को पकड़ा गया, जिनमें अली अकबर का नाम सामने आया।
प्राथमिक पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि इन विस्फोटकों का इस्तेमाल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था। हालांकि इस साजिश की पूरी परतें अभी जांच के बाद ही साफ हो पाएंगी।
चार साल पहले भी पुलिस रिकॉर्ड में आया था नाम
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि अली अकबर पहले भी विवादों में रह चुका है। वर्ष 2022 में अजमेर जिले के पीसांगन थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ एक शिकायत दर्ज हुई थी।
शिकायत के अनुसार गेस्ट हाउस से जुड़े किराए के विवाद को लेकर उसने एक व्यक्ति को जान से मारने की धमकी दी थी। उस समय पुलिस ने उसे शांतिभंग की धाराओं में गिरफ्तार कर पाबंद किया था।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम लेकर डराने की कोशिश
उस पुराने विवाद के दौरान अली अकबर ने खुद को कुख्यात गैंगस्टर Lawrence Bishnoi के गैंग से जुड़ा हुआ बताकर शिकायतकर्ता को डराने की कोशिश की थी।
हालांकि जांच एजेंसियां अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि उसका वास्तव में किसी गैंग से संबंध था या उसने केवल दहशत फैलाने के लिए गैंग का नाम लिया था।
साधारण जिंदगी से संदिग्ध नेटवर्क तक
अजमेर शहर के दिल्ली गेट इलाके के लोगिया मोहल्ले में रहने वाला अली अकबर सामान्य पारिवारिक जीवन जीता था। वह शहर में ऑटो चलाकर अपना गुजारा करता था।
उसके पिता राजस्थान रोडवेज में कंडक्टर रह चुके हैं और परिवार के अन्य सदस्य भी सामान्य कामकाज से जुड़े बताए जा रहे हैं। शादीशुदा अली अकबर के दो बच्चे भी हैं।
जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर एक साधारण ऑटो चालक का संपर्क आतंकी नेटवर्क से कैसे हुआ।
जांच में कुछ अहम सवालों पर फोकस किया जा रहा है—
क्या अली अकबर केवल विस्फोटक पहुंचाने वाला व्यक्ति था या किसी स्लीपर सेल का हिस्सा?
उसने पहले लॉरेंस गैंग का नाम क्यों लिया था, क्या इसका वास्तविक कनेक्शन है?
अजमेर और आसपास के इलाकों में उसके स्थानीय सहयोगी कौन थे?
सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचने में उसे किसने मदद की?
सुरक्षा एजेंसियां तलाश रहीं ‘मिसिंग लिंक’
फिलहाल जांच एजेंसियां अली अकबर के मोबाइल रिकॉर्ड, संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं था।
अगर जांच में इन कड़ियों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल विस्फोटक बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साजिश का बड़ा खुलासा भी हो सकता है।








