जोधपुर में नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जनगणना कार्य के लिए जारी की गई ड्यूटी सूची में ऐसे कर्मचारियों के नाम शामिल पाए गए हैं, जो या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं या काफी समय पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
डेढ़ साल पहले रिटायर कर्मचारी भी सूची में शामिल
जानकारी के अनुसार, प्रशासन द्वारा तैयार की गई सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो लगभग डेढ़ साल पहले रिटायर हो चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए जिम्मेदारी सौंप दी गई। इससे साफ है कि सूची तैयार करते समय रिकॉर्ड का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया।

मृत व्यक्तियों के नाम से भी जारी हुए आदेश
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सूची में ऐसे व्यक्तियों के नाम भी शामिल हैं जिनका निधन हो चुका है। इन नामों के सामने ड्यूटी लगने के आदेश जारी होना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में ही इस तरह की लापरवाही हो रही है, तो डेटा की विश्वसनीयता पर भी संदेह होना स्वाभाविक है।
जांच और सुधार की उठी मांग
मामले के उजागर होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि पूरी सूची की दोबारा जांच कर सही कर्मचारियों को ही ड्यूटी सौंपी जाए, ताकि जनगणना कार्य पारदर्शी और सटीक तरीके से पूरा हो सके।
डिजिटल अपडेट की कमी बनी वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गलती अक्सर पुराने डेटा या अपडेट न किए गए रिकॉर्ड के कारण होती है। यदि समय-समय पर कर्मचारियों की जानकारी को अपडेट किया जाए, तो इस प्रकार की चूक से बचा जा सकता है।
जोधपुर में सामने आया यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है, जो यह बताता है कि सरकारी प्रक्रियाओं में डेटा की शुद्धता और निगरानी कितनी जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।








