राजस्थान के उदयपुर में वर्ष 2022 में हुए बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है। करीब चार साल बीत जाने के बाद भी केस में अंतिम फैसला नहीं आने से पीड़ित परिवार की पीड़ा सामने आई है।
मृतक कन्हैयालाल के बेटे यश साहू ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा कर न्याय में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उनकी इस अपील ने न सिर्फ आम लोगों को झकझोरा, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
क्या था पूरा मामला?
जून 2022 में उदयपुर में एक दर्जी कन्हैयालाल की उनकी दुकान में घुसकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस नृशंस वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया था और मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था।
हत्या के पीछे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विवाद बताया गया था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी थी।
बेटे की भावुक गुहार
कन्हैयालाल के बेटे यश ने अपनी पोस्ट में कहा कि आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया है, इसके बावजूद सजा में देरी हो रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के पुराने बयान का हवाला देते हुए राज्य सरकार से स्पेशल कोर्ट बनाने की मांग की है।
उनकी सबसे मार्मिक अपील यह रही कि—
“जब तक पिता को न्याय नहीं मिलेगा, मैं उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित नहीं कर पाऊंगा।”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों की भावनाओं को गहराई से छू रहा है।
राजनीति भी हुई तेज
इस मामले को लेकर राजस्थान की सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि:
सत्ता में आए काफी समय बीत चुका है, फिर भी विशेष अदालत का गठन नहीं हुआ
यदि केस की रोजाना सुनवाई होती, तो अब तक दोषियों को सजा मिल चुकी होती
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाकर छोड़ दिया गया
जांच और ट्रायल की स्थिति
मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है, लेकिन अब तक सभी गवाहों की गवाही पूरी नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार, कुल गवाहों में से अभी कई की गवाही बाकी है, जिससे ट्रायल लंबा खिंच रहा है।
न्यायिक प्रक्रिया में देरी ही इस केस का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रहा है।
जनता में उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं—
आखिर 4 साल बाद भी केस का फैसला क्यों नहीं हो पाया?
स्पेशल कोर्ट बनाने में देरी क्यों हो रही है?
क्या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच न्याय प्रभावित हो रहा है?
कन्हैयालाल हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था, राजनीतिक इच्छाशक्ति और पीड़ित परिवार के दर्द का प्रतीक बन चुका है।
एक बेटे की अपने पिता के लिए न्याय की पुकार ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में तेजी कब आती है और पीड़ित परिवार को कब इंसाफ मिलता है।








