डॉलर के मुकाबले फिर टूटा रुपया पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें गिरावट का सिलसिला जारी है।
बुधवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.42 पर खुला और कारोबार के दौरान हल्की गिरावट के साथ 92.43 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर से तीन पैसे की कमजोरी दर्शाता है।
क्या कहते विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी इस गिरावट की बड़ी वजह बनी हुई हैं।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल कि हल्की नरमी का सहयोग
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हल्की नरमी और घरेलू शेयर बाजार की मजबूती ने रुपये की तेज गिरावट को कुछ हद तक रोक रखा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार में बढ़त देखने को मिली, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली जारी रही।
डॉलर इंडेक्स में भी मामूली मजबूती दर्ज की गई, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना। इससे पहले रुपया 92.47 के निचले स्तर तक पहुंच चुका है, जो इसके कमजोर प्रदर्शन को दर्शाता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसले रुपये की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, रुपया 92.10 से 92.75 प्रति डॉलर के दायरे में बना रह सकता है।




