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जोधपुर सेंट्रल जेल में बार-बार मोबाइल बरामद: 2017 से 2026 तक कई बार मिले फोन, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Jodhpur Jail me roja Party
Jodhpur Jail me roja Party

Jambhsar Media||जोधपुर

राजस्थान में Jodhpur Central Jail में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली इस जेल में शनिवार को बैरक के अंदर रोजा इफ्तार पार्टी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल प्रशासन हरकत में आया। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद जेल अधिकारियों ने तुरंत बैरकों की तलाशी अभियान चलाया। जिसमें बड़ी मात्रा में कैदियों से मोबाईल और सिमकार्ड मिले हैं

जैल प्रशासन तलाशी में खुले राज..

तलाशी के दौरान जेल प्रशासन को बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामान मिला। जांच में कैदियों के पास से 13 मोबाइल फोन और 6 सिम कार्ड बरामद किए गए। तलाशी में मोबाइल और सिम मिलने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि कैदी बैरकों के अंदर ही मोबाइल का उपयोग कर रहे थे। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दिया गया |

जैल प्रशासन ने शुरू करी कार्यवाही

जेल प्रशासन ने Ratanada Police Station में मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि मोबाइल और सिम कार्ड जेल के अंदर कैसे पहुंचे और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस और जेल प्रशासन अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। साथ ही जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, जैल की सुरक्षा कोण लगाता है सेंध क्योंकि इतनी सख्त सुरक्षा के बावजूद बैरकों के अंदर मोबाइल और सिम कार्ड मिलना गंभीर मामला माना जा रहा है। जोधपुर सेंट्रल जैल का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कई वर्षों में इस जेल से कई बार मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बार-बार बहस छिड़ती रही है।

जोधपुर सेंट्रल जैल अधीक्षक को किया ए पी ओ

जोधपुर सेंट्रल जैल मे रोजा इफ्तार पार्टी के फोटो जैल से वायरल होने के बाद सेंट्रल जैल अधीक्षक परदीप लखावत को APO कर दिया गया है तलासी के दोरान कैदियो ने विरोध भी किया था जिकों बादमे अधीक्षक ने संजाइस करके सांत किया गया लेकिन इसके अलावा आरोप भी लगे है की जाती विशेष के कैदियो को एक अलग बेरिक मे रखा गया है लेकिन इन सभी चर्चाओ के बीच अधीक्षक को APO करने के आदेश भी चर्चा क्अ विषय बना हुआ है

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वर्ष 2026 जैल मे मोबाइल वायरल फोटो के बाद बड़ी कार्रवाई: शनिवार को जेल की एक बैरक में रोजा इफ्तार पार्टी की फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। इसके बाद जेल प्रशासन हरकत में आया और तुरंत बैरकों की तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान कैदियों के पास से 13 मोबाइल फोन और 6 सिम कार्ड बरामद किए गए। जेल प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित कैदियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की सूचना पुलिस को भी दी गई। फिलहाल जांच की जा रही है कि मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचे और इसमें किस-किस की भूमिका हो सकती है।

जोधपुर सेंट्रल जैल मे बार बार मोबाइल मिलना..

पूर्व मे वर्ष दिसंबर 2018 मे छापेमारी में भी मिले थे: 2018 में जेल में तलाशी अभियान चलाया गया था। उस दौरान बैरकों की जांच में 5 मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इसके अलावा अलग-अलग तलाशी अभियानों के दौरान कुल मिलाकर 200 से अधिक मोबाइल फोन मिलने की जानकारी भी सामने आई थी। इस मामले ने उस समय भी जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।

मार्च 2017 : बड़ी सर्च ऑपरेशन में खुलासा: मार्च 2017 में पुलिस और जेल प्रशासन ने संयुक्त रूप से बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया था। उस अभियान में कैदियों के पास से 14 मोबाइल फोन और 24 सिम कार्ड बरामद किए गए थे। उस समय पुलिस ने मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच भी शुरू की थी कि कहीं कैदी जेल के अंदर से ही बाहरी दुनिया में अपराध या अवैध गतिविधियों को तो संचालित नहीं कर रहे थे।

बार-बार मोबाइल मिलने के पीछे क्या कारण

विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों के अनुसार जेल में मोबाइल मिलने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

> जेल कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत

>मुलाकात के दौरान तस्करी के जरिए मोबाइल अंदर पहुंचाना

>जेल परिसर में बाहर से मोबाइल फेंककर अंदर पहुंचाना

> कैदियों द्वारा बैरक, शौचालय, पानी की टंकी या ड्रेनेज जैसी जगहों पर मोबाइल छिपाकर रखना

सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

जोधपुर जैल मे लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के कारण सवाल उठ रहा है कि इतनी हाई-सिक्योरिटी मानी जाने वाली जोधपुर सेंट्रल जेल में मोबाइल जैसे प्रतिबंधित उपकरण आखिर बार-बार अंदर कैसे पहुंच रहे हैं। आखिर कोण है इसका जीमेदार विशेषज्ञों का मानना तो है कि जेलों में तकनीकी निगरानी, कड़ी तलाशी और कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके लेकिन आप लोगों क्अ क्या कहना है

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