राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने फलोदी क्षेत्र के किसानों के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने खेतों और रिहायशी इलाकों के ऊपर से जबरन बिजली लाइन बिछाने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
बिना मुआवजा लाइन बिछाने पर उठे सवाल
मामला उन किसानों से जुड़ा है जिन्होंने शिकायत की थी कि उनकी अनुमति के बिना और मुआवजा दिए बिना उनके खेतों व मकानों के ऊपर से बिजली लाइन डाली जा रही है। इससे फसल, जमीन और सुरक्षा को खतरा बताया गया।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
जस्टिस सुदेश बंसल की एकल पीठ ने राज्य सरकार, प्रशासन और संबंधित बिजली कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर किन नियमों के तहत बिना सहमति और मुआवजा दिए यह कार्य किया जा रहा है।
किसानों के अधिकारों पर जोर
अदालत ने साफ संकेत दिए कि किसानों की जमीन और संपत्ति के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब तक मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह का नया निर्माण या लाइन डालने का कार्य नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में संबंधित विभागों को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि बिजली लाइनों का काम किस प्रक्रिया और शर्तों के तहत आगे बढ़ेगा, और किसानों को क्या राहत या मुआवजा मिलेगा।
हाईकोर्ट ने बिजली लाइन कार्य पर लगाई रोक
बिना मुआवजा कार्रवाई पर सवाल
सरकार और कंपनियों को नोटिस
किसानों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
यह फैसला फलोदी ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के किसानों के लिए एक बड़ा संकेत है कि उनकी जमीन पर किसी भी प्रकार की परियोजना बिना उचित प्रक्रिया और मुआवजे के लागू नहीं की जा सकती।








