मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अब इसका असर वैश्विक व्यापार और खासकर भारत के कृषि निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि समुद्री मार्ग, शिपिंग शेड्यूल और लॉजिस्टिक्स पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। निर्यातकों और व्यापार संगठनों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में भारत के कई कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
सप्लाई चेन पर दबाव, हजारों कंटेनर अटके
ताजा जानकारी के अनुसार, भारतीय बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर 20 हजार से ज्यादा कंटेनर विभिन्न चरणों में अटके हुए हैं। जहाजों की आवाजाही धीमी होने और रूट बदलने के कारण माल समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे निर्यातकों की डिलीवरी शेड्यूल और भुगतान चक्र पर भी असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री मार्गों में अनिश्चितता के कारण कई शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा और वैकल्पिक रूट अपना रही हैं, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं।
ईंधन महंगा होने से बढ़ा शिपिंग खर्च
शिपिंग सेक्टर में ईंधन की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री ईंधन (बंकर फ्यूल) की कीमत करीब 700 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ा है।
निर्यातकों के अनुसार, लॉजिस्टिक्स खर्च में औसतन 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खासकर छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
11.8 अरब डॉलर के व्यापार पर मंडरा रहा खतरा
व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा हालात में लगभग 11.8 अरब डॉलर का भारतीय कृषि निर्यात जोखिम में आ सकता है। यदि शिपमेंट समय पर नहीं पहुंचता, तो कई अंतरराष्ट्रीय खरीदार ऑर्डर रद्द भी कर सकते हैं या वैकल्पिक बाजार तलाश सकते हैं।
इससे भारत की निर्यात साख और किसानों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इन उत्पादों के निर्यात पर सबसे ज्यादा असर
वर्तमान संकट का असर मुख्य रूप से उन कृषि उत्पादों पर देखा जा रहा है जिनकी अंतरराष्ट्रीय मांग अधिक है, जैसे—
बासमती चावल
केला
प्याज
मसाले और अन्य कृषि उत्पाद
इन उत्पादों के निर्यातकों का कहना है कि बढ़ती ढुलाई लागत और देरी के कारण कई सौदे कम लाभदायक हो गए हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव जल्द कम नहीं हुआ और समुद्री मार्ग सामान्य नहीं हुए, तो निर्यातकों को हर घंटे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
साथ ही, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत को वैकल्पिक शिपिंग रूट्स और लॉजिस्टिक्स रणनीतियों पर तेजी से काम करना होगा, ताकि निर्यात प्रभावित न हो और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
सरकार और उद्योग की नजर हालात पर
सरकार और व्यापार संगठनों द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है। संभावना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो निर्यातकों को राहत देने के लिए नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे—
शिपिंग लागत पर सहायता
वैकल्पिक व्यापार मार्ग
निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर मध्य-पूर्व के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक खाद्य और कृषि व्यापार पर भी पड़ रहा है।








