राजकोट/जैसलमेर।
गुजरात के All India Institute of Medical Sciences Rajkot में पढ़ रहे राजस्थान के जैसलमेर निवासी एमबीबीएस छात्र की आत्महत्या के मामले में पुलिस जांच के बाद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि छात्र लंबे समय से अपने ही साथ पढ़ने वाले कुछ विद्यार्थियों द्वारा कथित रूप से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहा था। मामले में पुलिस ने पांच छात्रों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार जैसलमेर जिले के रहने वाले 23 वर्षीय एमबीबीएस फाइनल ईयर छात्र रतन कुमार मेघवाल ने कुछ समय पहले हॉस्टल में आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद मिले सुसाइड नोट में छात्र ने अपने ही कॉलेज के पांच साथियों के नाम लिखते हुए आरोप लगाया था कि वे लगातार उसे परेशान करते थे, मारपीट करते थे और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे।
सुसाइड नोट से खुली प्रताड़ना की परतें
पुलिस के अनुसार सुसाइड नोट में रतन कुमार ने लिखा था कि कॉलेज के कुछ छात्र उसे बार-बार अपमानित करते थे और कई बार शारीरिक रूप से भी हमला किया गया। लगातार हो रही इस प्रताड़ना से वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया था। नोट में उसने स्पष्ट तौर पर उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस जांच के बाद 5 छात्र गिरफ्तार
घटना के बाद Rajkot पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। सुसाइड नोट, मोबाइल डेटा, हॉस्टल के छात्रों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पांच छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट और प्रताड़ना से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कॉलेज प्रशासन भी जांच में जुटा
इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने भी आंतरिक जांच समिति गठित की है। संस्थान की ओर से कहा गया है कि यदि किसी भी छात्र की भूमिका प्रताड़ना या रैगिंग में पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
परिवार ने की सख्त कार्रवाई की मांग
मृतक छात्र का परिवार राजस्थान के Jaisalmer जिले से ताल्लुक रखता है। परिवार का आरोप है कि रतन लंबे समय से परेशान था, लेकिन उसने परिवार को पूरी बात नहीं बताई थी। घटना के बाद परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
रैगिंग और छात्र उत्पीड़न पर फिर उठे सवाल
इस दुखद घटना के बाद मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग और छात्र उत्पीड़न को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों की मानसिक स्थिति पर लगातार नजर रखने और शिकायत तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।








