राजस्थान सरकार ने राज्य में कॉमर्शियल एलपीजी (LPG) के वितरण को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए नई नीति लागू की है। इस नीति के तहत अब होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और शादी समारोह जैसे बड़े उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर एक तय कोटे के अनुसार ही मिलेंगे। सरकार का उद्देश्य गैस की उपलब्धता को संतुलित रखना और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देना है।
क्या है नई नीति?
नई कॉमर्शियल LPG नीति के अनुसार, उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत, श्रेणी और उपयोग के आधार पर 40% से 100% तक गैस आवंटित किया जाएगा। यानी सभी को एक समान गैस नहीं मिलेगी, बल्कि उनके काम और प्राथमिकता के अनुसार कोटा तय होगा।
किन्हें मिलेगी प्राथमिकता?
सरकार ने उपभोक्ताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है—
100% कोटा: अस्पताल, आपात सेवाएं और अत्यावश्यक संस्थान
70% से 90% कोटा: होटल, रेस्टोरेंट, बड़े किचन
40% से 60% कोटा: मैरिज गार्डन, शादी समारोह, इवेंट आयोजक
इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जरूरी सेवाओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
क्यों लिया गया यह फैसला?
राजस्थान में पिछले कुछ समय से कॉमर्शियल गैस की मांग तेजी से बढ़ी है, खासकर शादी सीजन और पर्यटन सीजन के दौरान। कई बार शिकायतें आईं कि कुछ बड़े उपभोक्ता ज्यादा सिलेंडर ले लेते हैं, जिससे छोटे व्यवसाय और आम उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए यह नई नीति लागू की गई है।
क्या होगा असर?
होटल और रेस्टोरेंट को अपने उपयोग की बेहतर प्लानिंग करनी होगी
शादी समारोह आयोजकों को सीमित गैस में काम मैनेज करना पड़ेगा
आवश्यक सेवाओं को अब निर्बाध गैस सप्लाई मिल सकेगी
गैस की कालाबाजारी और स्टॉकिंग पर भी रोक लगेगी
निगरानी और लागू करने की प्रक्रिया
सरकार ने इस नीति के पालन के लिए सख्त निगरानी की व्यवस्था भी की है। गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तय कोटे के अनुसार ही सिलेंडर वितरित करें। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता को क्या फायदा?
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गैस की उपलब्धता संतुलित रहेगी और जरूरत के समय किसी भी वर्ग को कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
राजस्थान सरकार की यह नई कॉमर्शियल LPG नीति गैस वितरण को व्यवस्थित करने, जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देने और दुरुपयोग रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।








