जोधपुर: पश्चिमी राजस्थान में लंबे समय से आतंक का पर्याय बने 007 गैंग के सरगना राजू मांझू को आखिरकार पुलिस ने एक सुनियोजित ऑपरेशन में पकड़ लिया। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (ANTF) की टीम ने इस कार्रवाई को बेहद फिल्मी अंदाज में अंजाम दिया, जिसमें कई दिनों की निगरानी और रणनीति के बाद आरोपी को जयपुर से दबोचा गया।
फिल्मी अंदाज में बिछाया गया जाल
पुलिस के अनुसार, राजू मांझू को पकड़ना आसान नहीं था। वह लगातार ठिकाने बदलता रहता था और सीधे सामने आने से बचता था। ऐसे में टीम ने खुद को हथियार सप्लायर के रूप में पेश कर उससे संपर्क साधा।
कई दिनों की बातचीत के बाद भी जब वह सामने नहीं आया, तो पुलिस ने धैर्य बनाए रखा। आखिरकार जयपुर के मानसरोवर इलाके में मिलने का प्लान बना। यहां पुलिस टीम ने तीन दिन तक लगातार निगरानी रखी।
इस दौरान एक जवान ने चाय की थड़ी लगाकर मौके पर आम आदमी की तरह मौजूद रहकर नजर बनाए रखी। जैसे ही राजू तय समय पर पहुंचा, टीम ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
छोटे झगड़ों से शुरू हुआ अपराध का सफर
राजू मांझू, जो जोधपुर जिले के लोहावट क्षेत्र के जंभेश्वर नगर का रहने वाला है, ने करीब 2013 के आसपास छोटे विवादों से अपराध की दुनिया में कदम रखा।
धीरे-धीरे वह संगठित अपराध की ओर बढ़ा और कुछ ही सालों में एक कुख्यात गैंगस्टर बन गया।
‘007 गैंग’ का गठन और गैंगवार का दौर
साल 2017-18 के दौरान उसने अपने साथी श्याम पुनिया के साथ मिलकर 007 गैंग बनाई। बाद में गुरु के जेल जाने के बाद राजू खुद गैंग का सरगना बन बैठा।
उसकी गैंग का क्षेत्र में सक्रिय अन्य गैंगों से लगातार टकराव रहा, जिससे कई बार खुलेआम फायरिंग और गैंगवार की घटनाएं सामने आईं।
राजू और उसके साथियों का तरीका बेहद खतरनाक था—वे पहले विरोधियों का पीछा करते, फिर वाहन से टक्कर मारकर गोलियां चलाते थे।
36 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज
राजू मांझू पर हत्या, लूट, अपहरण, फायरिंग, मादक पदार्थ तस्करी और पुलिस पर हमले जैसे 36 से अधिक संगीन मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।
पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी और उसे पकड़ना बड़ी चुनौती बना हुआ था।
वसूली, हथियार और ड्रग्स का नेटवर्क
राजू ने अपराध की दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई रास्ते अपनाए।
टोल ठेकों और निर्माण कंपनियों से वसूली
अवैध हथियारों की सप्लाई
मादक पदार्थों की तस्करी
इन गतिविधियों के जरिए उसने अपना नेटवर्क फैलाया और आर्थिक रूप से खुद को मजबूत किया।
सोशल मीडिया पर ‘डॉन’ की छवि
राजू मांझू सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय था। हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो शेयर कर वह खुद को एक बड़े गैंगस्टर के रूप में पेश करता था।
इसी वजह से युवाओं के बीच उसकी एक अलग पहचान बन गई थी।
बड़े गैंगों से जुड़े तार
जांच एजेंसियों के अनुसार, राजू के संबंध देश के कुख्यात गैंग नेटवर्क से भी जुड़े हुए थे।
जेल में रहने के दौरान उसने अन्य गैंगस्टरों से संपर्क बनाए, जिससे उसका आपराधिक नेटवर्क और मजबूत हुआ।
पुलिस के लिए बड़ी सफलता
इस गिरफ्तारी को राजस्थान पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चल रहे अभियान के तहत यह ऑपरेशन लंबे समय की प्लानिंग और खुफिया जानकारी के आधार पर सफल हुआ।
अब आगे क्या?
पुलिस अब राजू मांझू से पूछताछ कर उसके नेटवर्क, साथियों और अन्य आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
संभावना है कि इस गिरफ्तारी के बाद पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय अन्य गैंगों पर भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
राजू मांझू की गिरफ्तारी सिर्फ एक गैंगस्टर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान में फैल रहे संगठित अपराध पर बड़ा प्रहार है। अब देखना होगा कि पुलिस इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में कितनी सफल होती है।








