मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi से फोन पर बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य फोकस क्षेत्र में बिगड़ते हालात और खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को खुला बनाए रखने पर रहा।
दोनों नेताओं ने इस अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने के पक्ष में है। उन्होंने संवाद और कूटनीति को ही इस संकट का स्थायी समाधान बताया।
ईरान में ऊर्जा ठिकानों पर हमला
ईरान में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए जब सोमवार देर रात कई एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
Isfahan में एक गैस प्लांट पर हमला
Khorramshahr में गैस पाइपलाइन को नुकसान
कई अन्य ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की खबर
इन हमलों के बाद ईरान के ऊर्जा सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और गहरी हो गई है।
हिजबुल्लाह का इजराइल पर जवाबी हमला
इस बीच लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने इजराइल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। संगठन ने इजराइल के 5 अलग-अलग ठिकानों पर:
मिसाइल हमले
ड्रोन अटैक
किए। इससे पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष और तेज हो गया है।
वैश्विक असर और भारत की चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते इस टकराव का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसके संभावित प्रभाव:
तेल की कीमतों में भारी उछाल
वैश्विक सप्लाई चेन पर असर
भारत जैसे आयातक देशों पर आर्थिक दबाव
भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से होता है।
शांति की अपील और कूटनीतिक प्रयास
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के युद्ध का समर्थन नहीं करता और संवाद, कूटनीति और शांति को प्राथमिकता देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई देश तनाव कम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
ईरान, इजराइल और उनके सहयोगियों के बीच बढ़ता संघर्ष अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। ट्रम्प और मोदी के बीच हुई बातचीत यह दर्शाती है कि बड़े देश इस संकट को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं। हालांकि, हालात कब तक सामान्य होंगे, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा।








