23 मार्च 2026 :- बीते कुछ दिनों में सोना और चांदी के भाव ने निवेशकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। आमतौर पर वैश्विक संकट या युद्ध जैसी परिस्थितियों में इन कीमती धातुओं के दाम तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच ये दोनों धातुएँ जमकर टूट रही हैं।
चांदी (सिल्वर) – पिछले एक हफ्ते में चांदी का भाव 32,000 रुपये प्रति किलो तक गिर गया।
सोना (गोल्ड) – 24 कैरेट सोने का भाव 1,58,399 रुपये से गिरकर 1,47,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, यानी एक सप्ताह में 9,181 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट।
एमसीएक्स और घरेलू बाजार दोनों में ही यह गिरावट देखने को मिली है। इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (ibja.com) के आंकड़े भी यही पुष्टि करते हैं।
गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण
सोना-चांदी की गिरावट सिर्फ युद्ध के चलते नहीं हुई। इसके पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:
यूएस फेड की ब्याज दर नीति – अमेरिका की केंद्रीय बैंकिंग संस्था ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है, जिससे सोने और चांदी पर दबाव बढ़ा है।
डॉलर की मजबूती – डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों ने सोना-चांदी जैसी धातुओं में निवेश कम किया।
क्रूड और महंगाई – होर्मुज जलसंधि पर तनाव और क्रूड ऑयल के दामों में वृद्धि ने वैश्विक महंगाई की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
वैश्विक निवेश धाराएँ – निवेशकों ने सुरक्षित संपत्ति के बजाय अन्य विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इन धातुओं की मांग कम हुई।
घरेलू बाजार पर असर
सोना-चांदी की इस गिरावट का असर भारतीय बाजार में भी साफ देखा जा सकता है। ज्वेलरी व्यापारियों और निवेशकों के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है, क्योंकि अक्सर त्योहारों और शादी सीज़न में सोने की मांग बढ़ जाती है।
सोना – घरेलू स्तर पर प्रति 10 ग्राम 9,181 रुपये तक सस्ता हुआ।
चांदी – 32,000 रुपये प्रति किलो तक गिरावट।
निवेशकों के लिए यह समय खरीदारी का मौका भी हो सकता है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता चिंता का कारण बनी हुई है।
युद्ध, ग्लोबल टेंशन और आर्थिक नीतियों के मिश्रित प्रभाव ने सोना-चांदी के भावों में अप्रत्याशित गिरावट पैदा की है। निवेशकों और आम जनता को चाहिए कि वे स्थिति का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करें और बिना सोचे-समझे भारी निवेश करने से बचें।








