राजस्थान में इन दिनों रविंद्र सिंह भाटी और छोटू सिंह रावणा के बीच छिड़ा विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सोशल मीडिया पर एक बड़ी ‘डिजिटल जंग’ में बदल गया है। दोनों ही शख्सियतें अपने-अपने क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय हैं और उनके करोड़ों समर्थक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आमने-सामने नजर आ रहे हैं।
फेसबुक और इंस्टाग्राम: भाटी की मजबूत पकड़
सोशल मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और इंस्टाग्राम पर रविंद्र सिंह भाटी का दबदबा साफ दिखाई देता है।
फेसबुक पर उनके करीब 15 लाख (1.5 मिलियन) फॉलोअर्स हैं, जहां उनके दौरे, भाषण और गतिविधियां तेजी से वायरल हो जाती हैं।
इसके मुकाबले छोटू सिंह रावणा के लगभग 1.29 लाख फॉलोअर्स हैं और वे इस प्लेटफॉर्म पर ज्यादा सक्रिय भी नहीं हैं।
इंस्टाग्राम पर भी भाटी का ‘जलवा’ कायम है, जहां उनके 30 लाख (3 मिलियन) फॉलोअर्स हैं।
वहीं छोटू सिंह रावणा के 14 लाख (1.4 मिलियन) फॉलोअर्स हैं और वे यहां काफी एक्टिव रहते हैं, जिससे उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
कुल मिलाकर, इन दोनों प्लेटफॉर्म्स पर भाटी को युवाओं का जबरदस्त समर्थन मिलता है।
यूट्यूब पर रावणा की ‘बादशाहत’
जहां राजनीति के मैदान में भाटी का प्रभाव है, वहीं डिजिटल कंटेंट और मनोरंजन के क्षेत्र में छोटू सिंह रावणा का दबदबा साफ नजर आता है।
रावणा के यूट्यूब चैनल पर 2.62 मिलियन (26.2 लाख) सब्सक्राइबर्स हैं।
उनके भजनों और वीडियो को करोड़ों व्यूज मिलते हैं, जिसमें एक वीडियो 235 मिलियन व्यूज तक पहुंच चुका है।
इसके विपरीत:
भाटी के यूट्यूब चैनल पर करीब 73,500 सब्सक्राइबर्स हैं।
उनका कंटेंट मुख्य रूप से राजनीतिक भाषणों और विधानसभा गतिविधियों तक सीमित रहता है।
यानी यूट्यूब की दुनिया में रावणा स्पष्ट रूप से आगे हैं।
एक्स (ट्विटर) पर भाटी का एकतरफा दबदबा
राजनीतिक बहस के सबसे बड़े मंच माने जाने वाले एक्स (ट्विटर) पर तस्वीर बिल्कुल अलग है।
रविंद्र सिंह भाटी के यहां 3.44 लाख फॉलोअर्स हैं और वे इस प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से उपयोग करते हैं।
वहीं छोटू सिंह रावणा की मौजूदगी यहां लगभग न के बराबर है।
इससे साफ है कि राजनीतिक मुद्दों पर डिजिटल नैरेटिव बनाने में भाटी की पकड़ मजबूत है।
‘डिजिटल आर्मी’ की भिड़ंत: कमेंट सेक्शन बना अखाड़ा
दोनों के बीच शुरू हुआ विवाद अब उनके समर्थकों के बीच खुली ‘सोशल मीडिया वॉर’ में बदल चुका है।
भाटी समर्थक उन्हें सही ठहराते हुए उनके राजनीतिक कामों को आगे रख रहे हैं।
वहीं रावणा के फैंस उनके यूट्यूब रिकॉर्ड्स और जनसमर्थन को उनकी ताकत बता रहे हैं।
नैरेटिव की लड़ाई
इस पूरे विवाद में अब दो अलग-अलग सोच भी सामने आ रही हैं:
एक पक्ष इसे लोकप्रियता के लिए किया गया विवाद बता रहा है
तो दूसरा पक्ष इसे सिस्टम के खिलाफ आवाज मान रहा है
अगर सोशल मीडिया के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर साफ है:
फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर रविंद्र सिंह भाटी मजबूत स्थिति में हैं
जबकि यूट्यूब पर छोटू सिंह रावणा का दबदबा है
यह मुकाबला केवल दो व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव vs सांस्कृतिक लोकप्रियता की लड़ाई बन चुका है, जहां हर प्लेटफॉर्म पर ‘विजेता’ अलग-अलग नजर आ रहा है।








