राजस्थान का मिनरल उद्योग इन दिनों गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अमेरिका–इजराइल–ईरान तनाव का असर अब प्रदेश के उद्योगों तक साफ दिखाई देने लगा है। खासकर खनिज आधारित छोटे और मध्यम उद्योगों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
डिमांड में गिरावट से उद्योग ठप
गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्री, जो राजस्थान के मिनरल्स की सबसे बड़ी खपत करती है, वहां पिछले कुछ समय से उत्पादन में कमी आई है। इसका सीधा असर राजस्थान की मिनरल ग्राइंडिंग यूनिट्स पर पड़ा है। मांग घटने के कारण लगभग 2300 से अधिक यूनिट्स बंद हो चुकी हैं।
हजारों मजदूर बेरोजगार
इन यूनिट्स के बंद होने से हजारों श्रमिकों की नौकरी चली गई है। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह इस उद्योग पर निर्भर थी, जो अब संकट में है। ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है।
बढ़ती लागत और घटती आमदनी
उद्योग संचालकों के सामने दोहरी चुनौती है—
एक तरफ डिमांड लगातार गिर रही है
दूसरी तरफ बिजली बिल, ब्याज दरें और संचालन लागत बढ़ती जा रही है
इस वजह से कई यूनिट्स करोड़ों के घाटे में पहुंच गई हैं और उन्हें बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
वैश्विक हालात का स्थानीय असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है। इससे एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट चेन कमजोर हुई है और सिरेमिक जैसे उद्योगों में उत्पादन घटा है। यही वजह है कि राजस्थान के खनिज उत्पादों की खपत अचानक कम हो गई।
उद्योग जगत की चिंता बढ़ी
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो यह संकट और गहरा सकता है। कई व्यापारी सरकार से राहत पैकेज, बिजली दरों में छूट और ब्याज में राहत की मांग कर रहे हैं।
सरकार से उम्मीदें
व्यापारिक संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि—
प्रभावित उद्योगों को आर्थिक सहायता दी जाए
बिजली दरों में राहत मिले
छोटे उद्योगों के लिए विशेष पैकेज लागू किया जाए
राजस्थान का मिनरल उद्योग, जो कभी राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ था, आज वैश्विक परिस्थितियों और घटती मांग के कारण संकट में है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और व्यापक रूप ले सकती है।








