BreakingMahakumbh's Monalisa turns out to be a minor! A major revelation comes after her marriage...BreakingA phone conversation resulted in death! A teacher was struck by the Vande Bharat train in Dausa, a heartbreaking accident.Breaking"The viral Mahakumbh girl turned out to be a minor! She married using a fake birth certificate, even the CMO was in trouble."Breaking"The Vaishno Devi pilgrimage proved a blessing! A sister's gaze fell upon her and she found her lost brother."Breaking"The brother's bier came before the sister's doli... mourning spread in the wedding house."Breakingराजस्थान की कॉलेज गर्ल बनी गैंगस्टर की दुल्हन: कौन है दुल्हन ? जानिए क्या है सच्चाईBreakingMahakumbh's Monalisa turns out to be a minor! A major revelation comes after her marriage...BreakingA phone conversation resulted in death! A teacher was struck by the Vande Bharat train in Dausa, a heartbreaking accident.Breaking"The viral Mahakumbh girl turned out to be a minor! She married using a fake birth certificate, even the CMO was in trouble."Breaking"The Vaishno Devi pilgrimage proved a blessing! A sister's gaze fell upon her and she found her lost brother."Breaking"The brother's bier came before the sister's doli... mourning spread in the wedding house."Breakingराजस्थान की कॉलेज गर्ल बनी गैंगस्टर की दुल्हन: कौन है दुल्हन ? जानिए क्या है सच्चाई
Crime·JambhSar Media·

बाड़मेर: बेटे को दुल्हन की तरह सजाकर क्लिक की फोटो, फिर पूरे परिवार ने टांके में लगा दी छलांग

बाड़मेर: बेटे को दुल्हन की तरह सजाकर क्लिक की फोटो, फिर पूरे परिवार ने टांके में लगा दी छलांग
बाड़मेर: बेटे को दुल्हन की तरह सजाकर क्लिक की फोटो, फिर पूरे परिवार ने टांके में लगा दी छलांग

राजस्थान के बाड़मेर जिले से आई एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां एक परिवार ने अपने बेटे को दुल्हन की तरह सजाया, उसकी तस्वीरें खींचीं और फिर पूरे परिवार ने एक साथ टांके में छलांग लगाकर जान दे दी। यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव, आर्थिक तंगी और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी का जीवंत उदाहरण है। ऐसी घटनाएं हमें बार-बार याद दिलाती हैं कि समाज में दिखावे, दहेज, बेरोजगारी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं कितनी गहरी और खतरनाक हो चुकी हैं।

क्या है पूरा मामल:

बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव में यह घटना बीती रात घटी। परिवार के लोगों ने बेटे को दुल्हन की तरह सजाया, उसके सिर पर सेहरा बांधा, हाथों में मेहंदी लगाई और पारंपरिक वस्त्र पहनाए। परिवार के अन्य सदस्य भी अच्छे कपड़ों में थे।
घर के आंगन में बेटे की मुस्कुराती हुई तस्वीरें खींची गईं। देखने वाले को लगा कि घर में कोई खुशी का मौका है, शायद बेटे की शादी की तैयारी हो रही है। लेकिन यह मुस्कान कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई।

रात होते ही पूरा परिवार घर से निकला और गांव के पास बने टांके में छलांग लगा दी। सुबह जब गांव वालों ने टांके के पास कपड़े और चप्पलें देखीं, तो शक हुआ। पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर जब टांके में तलाश की, तो परिवार के सभी सदस्य मृत अवस्था में मिले।

सामाजिक दबाव था या कुछ और:

पुलिस की शुरुआती जांच और ग्रामीणों की मानें तो परिवार पिछले कई महीनों से आर्थिक तंगी (Financial Crisis) से जूझ रहा था।
बेटे की शादी की उम्र निकल रही थी, लेकिन दहेज (Dowry) और बेरोजगारी (Unemployment) के कारण रिश्ता तय नहीं हो पा रहा था।
परिवार पर कर्ज भी था और समाज में बार-बार ताने मिल रहे थे—“अब तक बेटे की शादी नहीं हुई?”, “लड़का कमाता क्यों नहीं?”, “दहेज कहां से लाओगे?”
इन सवालों और दबावों ने परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
परिवार के किसी सदस्य ने सुसाइड नोट नहीं छोड़ा, लेकिन उनकी तैयारी, बेटे को दुल्हन की तरह सजाना और फिर सामूहिक आत्महत्या (Mass Suicide) – यह सब गहरी पीड़ा और लाचारी की कहानी बयां करता है।

पुलिस और प्रशासन ने क्या प्रतिक्रिया दिया:

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। पुलिस ने शवों को टांके से बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। प्रशासन ने परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक हालात और कर्ज की जांच शुरू कर दी है।
बाड़मेर के एसपी (SP) ने कहा, “यह घटना बेहद दुखद है। हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं। समाज को भी आत्ममंथन करना होगा कि आखिर ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं।”

गांव में सन्नाटा पसरा है। पड़ोसी और रिश्तेदार सदमे में हैं।
एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि इतना हंसता-खेलता परिवार एक दिन यूं खत्म हो जाएगा। समाज के तानों और पैसों की कमी ने इन्हें तोड़ दिया।”
गांव के युवाओं में गुस्सा है कि सरकार और प्रशासन बेरोजगारी और दहेज जैसी समस्याओं पर सिर्फ भाषण देता है, जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आता।

मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी:

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को लेकर समाज में जागरूकता की भारी कमी है।

  • लोग डिप्रेशन (Depression), चिंता (Anxiety) और सामाजिक दबाव को गंभीरता से नहीं लेते।
  • परिवार या रिश्तेदारों में कोई परेशानी हो तो उसे छुपा लिया जाता है, मदद मांगने में शर्म महसूस की जाती है।
  • गांवों में काउंसलिंग (Counseling) या मनोवैज्ञानिक सहायता (Psychological Help) की सुविधा लगभग नहीं के बराबर है।


आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव—ये तीनों मिलकर न जाने कितनी जिंदगियां लील चुके हैं।
समाज, सरकार, प्रशासन और हर नागरिक को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

बाड़मेर की इस घटना ने हमें फिर से सोचने पर मजबूर किया है कि दिखावे, दहेज, बेरोजगारी और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कितनी खतरनाक हो सकती है।

Share this article

Related Articles