बाड़मेर के छोटे से गाँव के जगदीश बिश्नोई यूएनओ मे भारत का प्रतिनिधत्व करगे
Jambhsar Media : बिशनोई अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार पर UNO मे 6 जून से होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय समेलन मे भारत की ओर से करेगे प्रतिनिधितव
भारत की ओर से बाड़मेर जिले के धोरीमना मे रड्डु गाव के रहने वाले जगदीश बिश्नोई प्रतिनिधित्व करेंगे इस सम्मेलन का कार्यक्रम थाईलैंड के बैंकॉक में यूएन के कॉन्फ्रेंस सेंटर में 6 जून से 9 जून तक आयोजित होने वाला है यह सम्मेलन वैश्विक सहयोग और समन्वय के लिए एक सामजस्य का कार्य करता है जिसमें विभिन्न देशों के सरकारी अधिकारी, नागरिक, समाज के नेताओं, मानवाधिकार सरंक्षकों , व्यापारी संघ, विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के बीच वार्तालाप करने का एक अवसर प्रदान करता हुआ सम्मेलन आयोजित होता है |
समेलन का मुख्य उदेश्य क्या होगा
सम्मेलन के अंदर भारत का प्रतिनिधित्व करने के रूप में राजस्थान मे बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना के जगदीश बिश्नोई का महत्वपूर्ण कार्य वहां पर होने वाला है इस कार्यक्रम के दोरान स्थानीय नेताओं के साथ सहयोग और विचार विमर्श को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य होगा | साथ ही विभिन्न देशों के सरकारी अधिकारियों के साथ योजनाबद्ध वार्तालाप और सहनशीलता को बढ़ावा देना रहेगा जिसके माध्यम से वैश्विक चुनौतियों के समाधान करने मानव अधिकारों को प्रसारित करने और सतत पोषणीय विकास को आगे बढ़ाने के सामूहिक प्रयास में अपना योगदान करेंगे इसके सम्मान और योगदान के माध्यम से वे वैश्विक समाज को भारत में आकर्षित करने और विभिन्न मुद्दों पर सहयोग समाधान के विकास में योगदान करेंगे जो वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रभावित करने के लिए सकारात्मक प्रभाव डालेगा
जगदीश बिशनोई का जीवन परिचय चल बसे थे माता-पिता छोटी उम्र के अंदर
जगदीश बिश्नोई का जन्म जनवरी 1996 में जुड़वा भाई के रूप में हुआ था ये कुल चार भाई हैं बड़ा भाई हरीश सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और दो इनसे छोटे हैं लेकिन दुख की बात ये है कि इनकी 3 वर्ष की छोटी उम्र में इनके पिता मंगलाराम जी का देहांत ऐक एक्सीडेंट मे हो गया था पिता की मौत को वर्ष भी नहीं हुआ था और कैंसर की बीमारी से जूझ रही माता रावणी देवी का भी निधन हो गया था घर में बूढ़े दादा-दादी जी हैं समय गुजरने लगा दादा दादी होसला बढ़ाते रहे ओर पढ़ाई की उम्र हुई पांचवी तक की पढ़ाई उन्होंने गांव के शासकीय विद्यालय मणकी से ही की और उसके बाद बारहवीं तक के गुरुकुल विद्या मंदिर एसएस स्कूल धोरीमाना से पढ़ाई करने के लिए आगे बढ़े गुरुकुल से पढ़ाई पूर्ण होने के बाद में वे दिल्ली पढ़ने की जिद करने लगे लेकिन परिवार की परिस्थितियां इस काबिल नहीं थी कि वह जा सके जिसके बाद गुरुकुल स्कूल के निदेशक गणपत राम जी ने बिशनोई ने जगदीश के सपनों को साकार करने के लिए उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलवाया दिया | जगदीश पढ़ाई मे शुरू से ही होनहार रहे है | लगातार अपनी मंजिलों की और आगे बढ़ने लगे ओर दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री लेकर आगे की पढ़ाई के लिए बनारस विश्वहिंदू यूनिवर्सिटी काशी मे लोकप्रसासन मे एम ए की पढ़ाई पूर्ण की इसके बाद अब वर्तमान मे पीएचडी चल रही है मां-बाप को खोने के बाद भी हौसले को जिंदा रखा ओर पढ़ाई जारी रखते हुए आज यह मुकाम हासिल किया है जिसके चलते जगदीश बिश्नोई को हर तरफ से शुभकामनाएं मिल रहे हैं यही कारण है कि उन्होंने सभी परेशानियों को छोड़कर शिक्षा को चुना जिससे सारी दुविधाए दूर होती गई |
अब तक जगदीश बिशनोई ने क्या क्या किया
Jagdish Bishnoi ने असम में शीर्ष शैक्षिक अधिकारियों से परामर्श करने के लिए NITI Aayog के आकांक्षी जिला परिवर्तन कार्यक्रम के तहत एक सलाहकार के रूप में काम किया है व सलाहकार के रूप में केंद्र सरकार की विभिन्न परियोजनाओं पर काम किया है, जिसमें भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, पंचायती राज मंत्रालय आदि शामिल हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।
इससे पहले भी जगदीश ने 2019 में हांगकांग में अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक नवाचार सम्मेलन, 2018 में भारत के उच्चायोग सिंगापुर में माननीय मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ भारतीय प्रवासी समुदाय की बातचीत, नेशनल यूनिवर्सिटी में फेस्टिवल ऑफ आइडियाज-2019 जैसे विभिन्न वैश्विक प्लेटफार्मों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके है सिंगापुर, वैश्विक सामाजिक उद्यमिता सम्मेलन, मलेशिया अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा विश्वविद्यालय जेसी जगह पर इनको काम करने का मोका मिल चुका है अब 06 जून से 09 जून 2023 तक थाईलैंड के बैंकॉक में यूएन के कॉन्फ्रेंस सेंटर में वैश्विक सहयोग और समन्वय के सामजस्य पर आयोजित कार्यक्रम मे भाग लेगे |









