मथुरा/बरेली: मथुरा-बरेली हाईवे पर एक बड़ा हादसा उस वक्त टल गया, जब एक स्कूल बस अचानक आग की लपटों में घिर गई। बस में करीब 30 स्कूली बच्चे सवार थे। स्थिति बेहद गंभीर थी क्योंकि शुरुआती समय में ड्राइवर को आग लगने का अंदेशा तक नहीं था।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चलते समय बस के इंजन हिस्से से अचानक धुआं निकलना शुरू हुआ, जो देखते ही देखते भयंकर आग में बदल गया। बस में बैठे बच्चे घबराकर शोर मचाने लगे, लेकिन तब तक हालात तेजी से बिगड़ चुके थे।
मौके पर पहुंचे सब-इंस्पेक्टर की बहादुरी
उसी दौरान वहां से गुजर रहे सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह यादव की नजर बस पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए अपनी गाड़ी बस के आगे लगाकर उसे रुकवाया। स्थिति को समझते हुए उन्होंने तुरंत स्थानीय लोगों को मदद के लिए बुलाया और बच्चों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया।
सभी बच्चे सुरक्षित, बड़ा हादसा टला
सब-इंस्पेक्टर और स्थानीय लोगों की तत्परता के चलते सभी बच्चों को समय रहते बस से बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, कुछ बच्चे डर और घबराहट की वजह से सहमे हुए नजर आए।
बस पूरी तरह जलकर राख
बचाव कार्य पूरा होने के कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते बस जलकर पूरी तरह खाक हो गई। अगर थोड़ी भी देरी होती, तो यह हादसा बेहद दर्दनाक रूप ले सकता था।
सूझबूझ और साहस की मिसाल
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि समय पर लिया गया फैसला कई जिंदगियां बचा सकता है। सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह यादव की बहादुरी और सतर्कता ने 30 परिवारों को बड़ी त्रासदी से बचा लिया।
ऐसे मौके हमें यह याद दिलाते हैं कि असली हीरो हमारे आसपास ही होते हैं—जो बिना किसी स्वार्थ के, अपने कर्तव्य को निभाते हुए दूसरों की जान बचाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।








