भारत में अब पेट्रोल सस्ता होने की उम्मीदों पर फिरा पानी Crude Oil Price In International Market
भारत मे ज्यादातर पेट्रोल डीजल बाहर है आयात किया जाता है जिसमे सऊदी अरब जेसे केई देश दुनिया मे तेल निर्यातक के अंदर अपनी अगरिणी भूमिका निभाते है अब सऊदी अरब crude oil news के अनुसार उत्पादन काम करने वाला है
क्या हैऑर्गेनाइजेशन ऑफ दी पेट्रोलियम एक्सपोर्ट कंट्रीज ( OPEC )
इसका पूरा नाम organization of the petroleum exporting countries (opec) ओपेक प्लस एक संस्था है जिसका पूरा नाम ( ऑर्गेनाइजेशन ऑफ दी पेट्रोलियम एक्सपोर्ट कंट्रीज ( OPEC ) के नाम से जाना जाता है पेट्रोलियम उत्पादक 13 देश इसके सदस्य देश हैं सऊदी अरब, अल्जीरिया, इराक, ईरान, कुवैत, अंगोला, संयुक्त अरब अमीरात, नाइजीरिया ,लीबिया, वेनेजुएला, गेबोन, गिनी तथा कांगो इसके सदेश्य देश है
ओपेक संस्था ( ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्ट कंट्री ) पेट्रोलियम निर्यातक देशों का एक संगठन है ये संस्था 14 सितंबर 1960 को बगदाद में पहले 5 सदस्य देशों इराक, ईरान, कुवेत, सऊदी अरब और वेनेजुएला द्वारा स्थापित की गई थी इसका मुख्यालय 1965 से बयाना ऑस्ट्रेलिया में हालांकि ये इसका सदस्य नहीं है जिसकी स्थापना तेल बाजार की स्थिरता तथा पेट्रोलियम की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई ओपेक देश विश्व के कुल 42% तेल का उत्पादन करते हैं विश्व के तेल भंडार का 73.2% हिस्सा ओपेक देशों में है
सऊदी अरब मे crude oil price in dollar क्या है
सऊदी अरब ने पेट्रोल उत्पादन में कमी लाने का इरादा किया है बताया जा रहा है कि सऊदी अरब में जुलाई से क्रूड के उत्पाद में प्रतिदिन 10 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया है सऊदी अरब में तेल की कीमतों को बढ़ाकर प्रति बैरल न्यूनतम $72.40 करने के साथ ही उत्पादन में कमी करने का फैसला लिया है सऊदी अरब क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट करने वाले देशों के संगठन जिसको ओपेक प्लस के नाम से जाना जाता है उसके साथ एक बैठक में उत्पादन में कटौती का फैसला लिया है
भारत के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां
रूस से सस्ता कच्चा तेल भारत हमेशा खरीदता है अब सऊदी अरब द्वारा इस प्रकार का फैसला लिए जाने पर भारत पर किस प्रकार की समस्याएं बढ़ सकती हैं उसके ऊपर अगर हम विचार करें तो हालांकि तेल उत्पादन में कटौती होने से इंडियन बास्केट में भी कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा जाहिर सी बात है जो अभी करीब डेढ़ साल के निचले स्तर प्रति बैरल 72.40$/बेरल हैं ऐसे में भारत में लोगों को सस्ते पेट्रोल-डीजल की किमते सस्ती होने की उम्मीदों पर पानी फिर्ता दिख रहा है अगर यह कटौती होती हैं तो भारत को तेल अब बढ़कर मिलेगी और साथ ही कटौती भारत जैसे देशों के लिए परेशानी को बढ़ाने वाली हो सकती है क्योंकि भारत सबसे ज्यादा आयातक देश हैं
अकेला सऊदी ही सऊदी जहां 10 लाख और अतिरिक्त बैरल की कटौती कर रहा है तो वही इराक रोजाना 2.1 1 लाख बेरल रोजाना की कटौती करने का लक्ष्य बना चुका है ओपेक जो दुनिया के अंदर 40 परसेंट से ज्यादा तेल की सप्लाई करने वाला संगठन है अगर ऐसा फैसला लिया जाता है तो भारत के अंदर जो उम्मीदें बढ़ रही थी तेल सस्ता होने की वह अब मुश्किल होती दिख रही हैं








