जयपुर। राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2025 परीक्षा से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में अहम बदलाव करते हुए ओवरएज अभ्यर्थियों को दी गई राहत का दायरा सीमित कर दिया है। अब केवल वे ही 713 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने इस मामले में याचिका दायर की थी।
दरअसल, पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह माना जा रहा था कि सभी ओवरएज अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की छूट मिल सकती है। लेकिन शुक्रवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की विशेष अवकाश पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि यह राहत केवल याचिकाकर्ताओं तक ही सीमित रहेगी।
क्या है पूरा मामला
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित SI भर्ती-2025 परीक्षा 5 और 6 अप्रैल को प्रस्तावित है। इस भर्ती में आयु सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें कुछ अभ्यर्थियों ने खुद को ओवरएज बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
इन अभ्यर्थियों का तर्क था कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और अन्य कारणों से उन्हें आयु सीमा में छूट मिलनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले अंतरिम राहत देते हुए उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी।
कोर्ट ने क्यों बदला फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अब अपने आदेश में संशोधन करते हुए साफ किया कि यह राहत सभी ओवरएज अभ्यर्थियों पर लागू नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि केवल वे उम्मीदवार ही इसका लाभ उठा सकेंगे, जिन्होंने इस संबंध में याचिका दायर की है।
इस फैसले से RPSC को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि इससे परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक बदलाव या अतिरिक्त व्यवस्थाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भर्ती प्रक्रिया पर असर
परीक्षा तय समय पर 5 और 6 अप्रैल को ही आयोजित होगी
केवल 713 याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों को ही ओवरएज होने के बावजूद मौका मिलेगा
अन्य ओवरएज उम्मीदवारों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा
अभ्यर्थियों में बढ़ी हलचल
सुप्रीम कोर्ट के इस संशोधित आदेश के बाद अभ्यर्थियों के बीच असमंजस और चर्चा का माहौल बन गया है। कई ऐसे उम्मीदवार जो इस राहत की उम्मीद कर रहे थे, अब निराश नजर आ रहे हैं।
आगे क्या होगा
यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मुख्य याचिका पर आगे भी सुनवाई जारी रहेगी, जिसमें आयु सीमा को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल परीक्षा प्रक्रिया अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि न्यायिक राहत का लाभ केवल सीमित दायरे में ही मिलेगा। इससे जहां भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता आई है, वहीं कई अभ्यर्थियों की उम्मीदों को झटका भी लगा है।








