राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मधुमक्खियों के हमले ने भयावह रूप ले लिया। पहले एक बुजुर्ग की मौत हुई और फिर उनके अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट पर एक बार फिर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। इस दूसरी घटना में भी एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि करीब 50 लोग घायल हो गए।
पहला हमला: बुजुर्ग की जान गई
मामला जिले के बेगूं क्षेत्र के पारसोली गांव का है। यहां 80 वर्षीय बुजुर्ग पर पहले मधुमक्खियों ने हमला किया था, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बुधवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
श्मशान घाट पर फिर टूटा कहर
बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के लिए जब ग्रामीण श्मशान घाट पहुंचे और तैयारियां चल रही थीं, तभी अचानक मधुमक्खियों का झुंड फिर से आक्रामक हो गया। देखते ही देखते वहां मौजूद लोगों पर हमला शुरू हो गया।
हमले से अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, यहां तक कि कुछ लोग शव को वहीं छोड़कर भाग गए।
दूसरे हमले में एक और मौत
इस हमले में करीब 50 लोग मधुमक्खियों के डंक से घायल हो गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई गई। इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई।
घटना में घायल हुए लोगों में से कई को गंभीर हालत में चित्तौड़गढ़ के अस्पताल में रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार कुछ मरीजों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
पीपीई किट पहनकर किया अंतिम संस्कार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया। अधिकारियों ने मेडिकल टीम को मौके पर बुलाया और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए।

मधुमक्खियों के दोबारा हमले की आशंका को देखते हुए कुछ लोगों को पीपीई किट पहनाकर श्मशान घाट भेजा गया, जिसके बाद बुजुर्ग का अंतिम संस्कार सुरक्षित तरीके से पूरा कराया गया।
प्रशासन अलर्ट, इलाके में दहशत
घटना के बाद प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया है। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और मधुमक्खियों के झुंड को हटाने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी की जा रही है।
चित्तौड़गढ़ में मधुमक्खियों का यह हमला न केवल एक दुखद हादसा है, बल्कि यह चेतावनी भी है कि प्राकृतिक खतरों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रशासन अब स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास में जुटा है, ताकि आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








