संसद में विपक्ष के नवनिर्मित या यूं कहें पुनः नामकरण द्वारा बने गठबंधन (UPA to I.N.D.I.A) द्वारा मणिपुर मामले में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ चल रही तीन दिवसीय अविश्वास प्रस्ताव बहस का आज समापन हो जाएगा। इसी बीच आज शाम चार बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में जवाब देंगे। कल राहुल गांधी की संसद में स्पीच के बाद स्मृति ईरानी और अमित शाह द्वारा राहुल को दिए जवाब के दौरान संसद में काफी तीखी बहस देखने को मिली। वहीं आज फिर मोदी की वाक्पटुता से विपक्ष के साथ तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
मणिपुर हिंसा मुद्दे पर विपक्ष द्वारा सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अब तक सभी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। वहीं विपक्ष का मोदी द्वारा संसद को संबोधित करने के लिए लिए प्रेरित करने का उद्देश्य भी सफल होने जा रहा है। जहां काँग्रेस सत्तारूढ़ पार्टी को मणिपुर मुद्दे पर घेरती हुई नजर आ रही है वहीं अन्य सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी है। इस कारण लग रहा है कि विपक्ष को मणिपुर पर बीजेपी को घेरने की कहानी फीकी पड़ती नजर आ रहा है।
PM Modi on Manipur: कल राहुल गांधी के हमलों को पहले स्मृति ईरानी और फिर अमित शाह द्वारा नकारने के बाद आज प्रधानमंत्री शाम 4 बजे संसद को संबोधित करने जा रहे है। जैसा कि हम जानते ही है, जिस तरह विपक्ष के हमलों का सकारात्मक और व्यंग्यात्मक प्रत्योत्तर पीएम मोदी देते है वहीं पूरा विपक्ष ढेर हो जाता है। संसद में वक्तव्य के दौरान मोदी का आत्मविश्वास न केवल पार्टी को ताकतवर करेगा, इसके साथ साथ 2018 की यादों को भी ताजा करेगा जब राफेल मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। तब काँग्रेस का कहना था कि राफेल डील में मोदी सरकार ने घोटाला किया है और मोदी घबराए हुए है। उस दौरान अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री जोरदार पलटवार किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि इस अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य नकारात्मक राजनीति के माध्यम से देश में अस्थिरता फेलाना है।
2018 में उस अविश्वास प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काँग्रेस और विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि “मैं ईश्वर से प्रार्थना करत हूँ कि वह आपको 2024 में भी अविश्वास प्रस्ताव को लाने की शक्ति दे।”
मोदी के संभाषणों से चारों खाने चित होने वाली काँग्रेस के ऐसे कदमों के नतीजे आखिरकार भाजपा के ही पक्ष में जाते नजर आते है। 2018 के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान मोदी के जोरदार पलटवार ने विपक्ष के आत्मविश्वास को कमजोर कर दिया था और जिसके बाद 2019 के नतीजे तो हमें मालूम ही है। हर बार विपक्ष मोदी सरकार को देश के सामने अपनी योजनाएं और उपलब्धियां गिनाने का मौका दे ही देता है। इस बार भी यही होता नजर आ रहा है।
वहीं कल अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच हुई तीखी बहस की बात करें तो राहुल गांधी अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे। उन्होंने मणिपुर हिंसा पर बोलते हुए इसे भारत माता की हत्या होना बताया था। इसके बाद बीजेपी ने राहुल गांधी से “असंसदीय भाषा” का इस्तेमाल करने के लिए माफी मांगने की मांग की है। इस पर काँग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि “राहुल गांधी द्वारा यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाया गया था। अगर कोई शब्द असंसदीय है तो उसे हटाने का प्रावधान है। मैंने इस मुद्दे को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाया है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को देखेंगे”
संसद में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का पीएम मोदी द्वारा जवाब देने से पहले आज गुरुवार को तृणमूल काँग्रेस पार्टी के नेता ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उनके संसद में उपस्थित नहीं होने पर कहा कि जब 21 दिनों का मानसून सत्र शुक्रवार को समाप्त होने वाला है और अभी भी प्रधानमंत्री “फरार” है।
क्या मोदी सरकार अविश्वास प्रस्ताव हार जाएगी?
संख्या की बात करें तो भाजपा के नेतृत्व वाला NDA लोकसभा में 331 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत रखता है। वहीं अकेली भाजपा के पास लोकसभा में 303 सांसद है। इसके अलावा विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के कुल 143 सांसद है। वहीं 70 ऐसे सांसद है जो इन दोनों में से किसी भी गठबंधन से संबंधता नहीं रखते है।
यह दूसरा मोका है जब मोदी सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ रहा है। पहली बार 2018 में विपक्ष के 135 सांसदों द्वारा समर्थन करने और 330 सांसदों द्वारा विरोध के मद्देनजर वह अविश्वास प्रस्ताव हार गई थी। इस बार भी यही होता नजर आ रहा है। जबकि ये तो पहले से ही तय था कि संख्या के मामले में विपक्ष संसद में NDA को नहीं हरा पाएगी।
इस पर विपक्ष का कहना है कि उनका उद्देश्य 3 महीनों से जारी मणिपुर में हिंसा पर प्रधानमंत्री को बोलने पर मजबूर करना है। शुरू में विपक्ष को ऐसा ही लगा लेकिन अब यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के हाथ से जाता नजर आ रहा है। विपक्ष को यह अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए इतनी पब्लिसिटी करने के बावजूद कहानी उनके हाथ से निकलती जा रही है। भाजपा को तो देश के सामने अपनी योजनाएं और विकास कार्यों को गिनाने का मौका ही मिला है। 2018 की तरह ही इस बार का यह अविश्वास प्रस्ताव भी भाजपा को 2024 में बढ़त बनाने में सहायक होगा। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार शाम 4 बजे के अपने वक्तव्य में किस तरह विपक्ष के सवालों का जवाब देते है।








