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अब नहीं बहेगा जहर! जोजरी-बांडी-लूनी नदी प्रदूषण मामला सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार एक्शन मोड में...

राजस्थान समाचार, जोधपुर समाचार, पाली समाचार, बालोतरा समाचार, नदी प्रदूषण, लूणी नदी, बांदी नदी, जोजारी नदी, भारत का सर्वोच्च न्यायालय, पर्यावरण संबंधी मुद्दे, प्रदूषण नियंत्रण, राजस्थान सरकार
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जोधपुर/पाली/बालोतरा। राजस्थान की प्रमुख नदियों—जोजरी, बांडी और लूनी—में बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब मामला गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है।

हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ संकेत दिए कि नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए अब ठोस और प्रभावी कदम जरूरी हैं। इसके बाद सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए एक उच्च स्तरीय निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया है।

हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी को मिली जिम्मेदारी

सरकार ने नदी प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण के लिए बनाई गई हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी को अधिक अधिकार दिए हैं। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य नदियों के जलस्तर, प्रदूषण स्रोत और सुधारात्मक कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग करना है।

इसके तहत आरएएस अधिकारी मनोज सोलंकी को कमेटी का रजिस्ट्रार (नोडल ऑफिसर) नियुक्त किया गया है, जो विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर काम को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।

प्रदूषण का मुख्य कारण: औद्योगिक अपशिष्ट

जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्रों में टेक्सटाइल और डाइंग इंडस्ट्री की बड़ी संख्या है। लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कई इकाइयां बिना ट्रीटमेंट के केमिकल युक्त पानी नदियों में छोड़ रही हैं।

  • जोजरी और बांडी नदी सबसे ज्यादा प्रभावित

  • लूनी नदी तक प्रदूषित पानी पहुंचने से व्यापक असर

  • आसपास के गांवों में पीने के पानी और खेती पर खतरा

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  • सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब करते हुए पूछा कि अब तक प्रदूषण रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

    अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं।

    सरकार की कार्ययोजना

    राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई कदमों की रूपरेखा तैयार की है:

    • प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों की पहचान

  • अवैध डिस्चार्ज पर सख्त कार्रवाई

  • कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की निगरानी

  • नियमित सैंपलिंग और रिपोर्टिंग सिस्टम

  • स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त कार्रवाई

  • स्थानीय लोगों में उम्मीद

    लंबे समय से नदी प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि अगर निगरानी सही तरीके से लागू हुई तो नदियों की स्थिति में सुधार संभव है।

    जोजरी, बांडी और लूनी नदियों का प्रदूषण अब केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि जनजीवन का बड़ा मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार का यह कदम अहम माना जा रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन फैसलों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी।

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