राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसका नाम रखा गया है— “संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ”। यह सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले स्थानीय चुनावों और 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी का मजबूत आधार माना जा रहा है।
मिशन 5.5 लाख: जमीनी स्तर पर संगठन विस्तार
कांग्रेस ने इस अभियान के तहत पूरे राजस्थान में महज एक महीने के भीतर करीब 5.5 लाख नए पदाधिकारियों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया है।
प्रदेश की लगभग 14 हजार ग्राम पंचायतों में 21-21 सदस्यीय कमेटियां बनाई जाएंगी
करीब 11 हजार शहरी वार्डों में भी इसी तरह की टीम तैयार होगी
इससे हर गांव और वार्ड में कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता सीधे संगठन से जुड़ेंगे
इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से मजबूत करना और हर क्षेत्र में सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
तीन चरणों में पूरा होगा अभियान
कांग्रेस ने इस पूरे अभियान को एक सुनियोजित तरीके से तीन चरणों में बांटा है:
पहला चरण (1 से 7 अप्रैल)
ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर कार्यकारिणी का गठन
संगठन की बुनियाद तैयार करने पर फोकस
दूसरा चरण (8 से 14 अप्रैल)
ब्लॉक, विधानसभा और जिला स्तर पर नियुक्तियां
स्थानीय नेतृत्व को जिम्मेदारी देना
तीसरा चरण (15 अप्रैल के बाद)
पूरे अभियान की समीक्षा
आगे के जनआंदोलनों और राजनीतिक रणनीति की तैयारी
भाजपा सरकार पर सीधा हमला
कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार को सीधे निशाने पर लिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में देरी कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने इसे “पर्ची सरकार” बताते हुए कहा कि जनता की आवाज दबाई जा रही है।

घर-घर पहुंचकर जनजागरण
इस अभियान का एक अहम हिस्सा जनसंपर्क भी है।
कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे
चुनावों में देरी और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता से संवाद करेंगे
भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगे
इससे पार्टी सीधे आम जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है।
पुराने कार्यकर्ताओं की वापसी
कांग्रेस संगठन को फिर से सक्रिय बनाने के लिए पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी दोबारा जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
लंबे समय से निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी
जमीनी स्तर के नेताओं को आगे लाया जाएगा
इसे भाजपा के “पन्ना प्रमुख मॉडल” के जवाब के रूप में देखा जा रहा है
गांवों में बढ़ेगी सियासी हलचल
इस अभियान का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल सकता है। अब कांग्रेस के बड़े नेता, विधायक और पूर्व मंत्री गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने में जुटेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अभियान सफल रहा, तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस को सीधा फायदा मिल सकता है और भाजपा के मजबूत क्षेत्रों में भी चुनौती खड़ी हो सकती है।कांग्रेस का “संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ” अभियान राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा प्रयोग है। यह सिर्फ संगठन विस्तार नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और सत्ता की वापसी की रणनीति का हिस्सा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कांग्रेस अपने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समय पर पूरा कर पाती है और क्या इसका असर आने वाले चुनावों में नजर आता है या नहीं।








