चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्तौड़गढ़ दौरे के दौरान मेवाड़ की वीरता और इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ आक्रांताओं के नाम भुला दिए जाते हैं, लेकिन राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले नायकों की गाथा सदियों तक याद रखी जाती है। उन्होंने कहा कि आज भी मेवाड़ की परंपरा, महाराणा प्रताप और रानी पद्मिनी की विरासत भारतीय समाज को गौरव और प्रेरणा देती है।
चित्तौड़गढ़ की धरती को बताया वीरों की भूमि
मुख्यमंत्री ने चित्तौड़गढ़ ऐतिहासिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक किला नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब भी वे इस भूमि को देखते हैं तो उन्हें मेवाड़ के शौर्य और त्याग की याद आती है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की धरती ने अनेक वीरों और वीरांगनाओं को जन्म दिया, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि यहां की परंपरा आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
महाराणा प्रताप और रानी पद्मिनी की परंपरा का जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप और ऐतिहासिक व्यक्तित्व रानी पद्मिनी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वंश परंपरा और इतिहास आज भी समाज के सामने जीवंत है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया, उनका सम्मान और स्मरण हमेशा होता रहेगा।
उन्होंने कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि जो राष्ट्र अपनी संस्कृति और विरासत को याद रखता है, वही आगे बढ़ता है।
आक्रांताओं पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि इतिहास में कई ऐसे आक्रमणकारी आए जिन्होंने भारत की संस्कृति और सभ्यता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। लेकिन समय के साथ उनका नाम और पहचान धुंधली पड़ गई।
इसी संदर्भ में उन्होंने दिल्ली सल्तनत के शासक Alauddin Khilji का उल्लेख करते हुए कहा कि आज लोग वीरों और त्यागियों को जानते हैं, जबकि आक्रमणकारियों को बहुत कम लोग याद करते हैं।
“एकलिंग का आसन है, इस पर किसी का शासन नहीं”
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में मेवाड़ की परंपरा का उल्लेख करते हुए एक प्रसिद्ध पंक्ति भी दोहराई—
“ये एकलिंग का आसन है, इस पर न किसी का शासन है।”
उन्होंने कहा कि यह पंक्ति मेवाड़ की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की भावना को दर्शाती है। यहां की संस्कृति भगवान एकलिंग की परंपरा से जुड़ी है, और मेवाड़ के शासकों ने हमेशा खुद को भगवान एकलिंग का सेवक माना।
इतिहास और विरासत से प्रेरणा लेने का संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत की नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और वीरों के बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ की यह पावन भूमि हमें यह याद दिलाती है कि राष्ट्र की रक्षा और सम्मान के लिए त्याग और साहस सबसे बड़ा मूल्य है।
उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ का किला केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की अस्मिता और गौरव का प्रहरी है।





