पुष्कर की पवित्र धरती इन दिनों एक अनोखी साधना की साक्षी बन रही है। पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर रूस से आई एक साध्वी, योगिनी अन्नपूर्णा नाथ, पिछले 9 दिनों से कठिन ‘खड़ेश्वरी तप’ कर रही हैं। इस तपस्या में साधक को लगातार खड़े रहकर ही साधना करनी होती है—न बैठना, न सोना।
क्या है ‘खड़ेश्वरी तप’?
नाथ संप्रदाय में यह तप अत्यंत कठिन और दुर्लभ माना जाता है। इसमें साधक को 24 घंटे लगातार खड़े रहकर ध्यान और साधना करनी पड़ती है। यह तप शरीर और मन दोनों की सीमाओं की परीक्षा लेता है। साध्वी अन्नपूर्णा नाथ इसी तप को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही हैं।
शरीर पर दिखने लगा असर
लगातार खड़े रहने के कारण उनके पैरों में सूजन आ गई है और शारीरिक थकावट साफ दिखाई दे रही है। बावजूद इसके, उन्होंने बैठने या आराम करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह साधना उनके आत्मिक लक्ष्य और ईश्वर भक्ति के लिए है।
8 महीने से भारत में कर रही साधना
जानकारी के अनुसार, योगिनी अन्नपूर्णा नाथ पिछले 8 महीनों से भारत में रहकर आध्यात्मिक साधना कर रही हैं। उन्होंने नाथ परंपरा को अपनाया है और भारतीय संस्कृति व योग साधना में गहरी आस्था रखती हैं।
श्रद्धालुओं की उमड़ रही भीड़
इस अनोखी तपस्या को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जयपुर घाट पर पहुंच रहे हैं। लोग उनकी दृढ़ता और भक्ति को देखकर आश्चर्यचकित हैं और उन्हें आशीर्वाद लेने के लिए भीड़ लग रही है।
आध्यात्मिक संदेश और प्रेरणा
योगिनी अन्नपूर्णा नाथ की यह तपस्या केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मसंयम, संकल्प और भक्ति का प्रतीक बन गई है। उनका यह प्रयास यह संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आस्था से इंसान कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल कर सकता है।
पुष्कर की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि आध्यात्मिकता की कोई सीमा नहीं होती। विदेशी भूमि से आई एक साध्वी का यह कठिन तप भारतीय संस्कृति की गहराई और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।








