भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए टिकट रिफंड और बोर्डिंग नियमों में अहम बदलाव करने का फैसला लिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगाना और बुकिंग सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।
क्या हैं नए टिकट रिफंड नियम?
रेलवे ने कन्फर्म टिकट के रिफंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब टिकट रद्द करने के समय के अनुसार रिफंड तय होगा:
1. 72 घंटे से पहले
टिकट कैंसिल करने पर न्यूनतम शुल्क कटौती के बाद लगभग पूरा पैसा वापस मिलेगा
यानी यात्रियों को पहले की तरह ही राहत
2. 72 से 24 घंटे के बीच
कुल किराए का 25% रद्दीकरण शुल्क कटेगा
बाकी रकम रिफंड कर दी जाएगी
3. 24 से 8 घंटे के बीच
अब 50% किराया कटेगा
यानी आधा पैसा ही वापस मिलेगा
4. ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय
कोई रिफंड नहीं मिलेगा (Zero Refund)
यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है
बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियम में राहत
रेलवे ने यात्रियों को एक बड़ी सुविधा भी दी है:
अब क्या नया है?
यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन ऑनलाइन बदल सकते हैं
पहले यह सुविधा केवल चार्ट बनने तक ही सीमित थी
ध्यान रखें ये जरूरी नियम
नया बोर्डिंग स्टेशन चुनने के बाद उसी स्टेशन से यात्रा शुरू करनी होगी
अगर यात्री पुराने स्टेशन से चढ़ने की कोशिश करता है, तो उसे यात्रा की अनुमति नहीं मिलेगी
क्यों किए गए ये बदलाव?
रेलवे के अनुसार इन नियमों का मुख्य उद्देश्य है:
टिकटों की कालाबाजारी पर रोक लगाना
बुकिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना
वास्तविक यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराना
डिजिटल सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाना
यात्रियों के लिए क्या है इसका असर?
अब आखिरी समय में टिकट कैंसिल करना महंगा पड़ेगा
यात्रियों को यात्रा की योजना पहले से तय करनी होगी
बोर्डिंग स्टेशन बदलने की नई सुविधा से फ्लेक्सिबिलिटी जरूर बढ़ी है
रेलवे के ये नए नियम यात्रियों के लिए जहां एक ओर सख्ती लाते हैं, वहीं दूसरी ओर सुविधा भी बढ़ाते हैं। खासकर बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा से यात्रियों को राहत मिलेगी, लेकिन रिफंड नियमों में सख्ती से अब योजना बनाकर ही टिकट बुक करना जरूरी हो गया है।





