पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में इन दिनों एक राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। शिव क्षेत्र के विधायक रविंद्र सिंह भाटी और प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावणा के बीच शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुंच चुका है। मामले ने ऐसा मोड़ ले लिया है कि यह केवल दो व्यक्तियों का विवाद न रहकर सामाजिक तनाव का रूप लेता दिख रहा है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
पूरा विवाद एक फोन कॉल से शुरू हुआ बताया जा रहा है। छोटू सिंह रावणा ने आरोप लगाया कि विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उन्हें फोन पर धमकाया और अप्रत्यक्ष रूप से जान से मारने की बात कही। इस आरोप के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते यह विवाद सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।
वहीं दूसरी ओर विधायक भाटी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग दूसरों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें बेवजह विवाद में घसीटा जा रहा है।
कलेक्ट्रेट से एसपी ऑफिस तक पहुंचा मामला
मंगलवार को छोटू सिंह रावणा अपने समर्थकों के साथ बाड़मेर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में रावणा समाज के लोग मौजूद रहे।
उनकी मुख्य मांगें थीं:
विधायक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना
निष्पक्ष तरीके से FIR दर्ज करना
रावणा ने यह भी आशंका जताई कि राजनीतिक प्रभाव के कारण उनकी रिपोर्ट दर्ज करने में बाधा आ सकती है।

समाजों के बीच सुलह की पहल
बढ़ते तनाव को देखते हुए श्री राजपूत समाज सेवा समिति ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। समिति के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि यह दो व्यक्तियों का विवाद है, इसे दो समाजों के टकराव में नहीं बदलना चाहिए।
समिति ने यह भी कहा कि:
दोनों समाज सदियों से आपसी भाईचारे में जुड़े हुए हैं
विवाद को संवाद के जरिए सुलझाया जाना चाहिए
कुछ असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं
‘राजीनामा’ की चर्चा तेज
विवाद के बीच अब ‘राजीनामा’ यानी समझौते की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। समाज के प्रबुद्ध लोग दोनों पक्षों को एक मंच पर बैठाकर समाधान निकालने की कोशिश में जुटे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक सहमति सामने नहीं आई है।
सरकार और प्रशासन की नजर
राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार सामाजिक समरसता पर जोर देती रही है। ऐसे में बाड़मेर जैसे संवेदनशील जिले में बढ़ता यह विवाद प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले को नहीं सुलझाया गया तो:
सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है
स्थानीय चुनावों पर असर पड़ सकता है
क्षेत्रीय राजनीति में नया समीकरण बन सकता है
अब सभी की नजर 1 अप्रैल को संभावित FIR दर्ज होने पर टिकी है। यदि मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता है, तो विवाद और गहरा सकता है। वहीं, यदि सुलह की पहल सफल होती है, तो यह एक सकारात्मक उदाहरण भी बन सकता है।
भाटी-रावणा विवाद फिलहाल एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जहां एक ओर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है तो दूसरी ओर समाज के स्तर पर सुलह के प्रयास जारी हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह मामला शांति से सुलझेगा या फिर और बड़ा रूप लेगा।








